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अलवर में ऑनलाइन स्मैक डिलीवरी का भंडाफोड़, शहर के इन इलाकों में बिक रहा नशा

अलवर शहर में नशे का कारोबार अब खुलेआम डिजिटल रूप ले चुका है। पत्रिका के एक रिपोर्टर ने तीन दिन तक जान जोखिम में डालकर नशे के सौदागरों की काली दुनिया की परतें खोलीं और उनकी करतूतों को कैमरे में कैद किया।

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Aug 04, 2025
स्मैक खरीदता रिपोर्टर व स्मैक की पुड़िया (इनसेट) (फोटो - पत्रिका)

अलवर शहर में नशे का कारोबार अब खुलेआम डिजिटल रूप ले चुका है। पत्रिका के एक रिपोर्टर ने तीन दिन तक जान जोखिम में डालकर नशे के सौदागरों की काली दुनिया की परतें खोलीं और उनकी करतूतों को कैमरे में कैद किया। शहर में स्मैक की ऑनलाइन डिलीवरी हो रही है। फोन पर ऑर्डर मिलते ही तस्कर ग्राहक को स्मैक उपलब्ध करा रहे हैं। पेमेंट भी क्यूआर कोड या दूसरे ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है। कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा भी है।

पुलिस से बचने के लिए नशे के सौदागर क्यू, डोज, क्वार्टर और पुड़िया आदि नामों और कोड से स्मैक बेच रहे हैं। यह जहर शहर के युवाओं की नसों में घुल रहा है। बातचीत के दौरान खास कोड का इस्तेमाल किया जाता है। बोगस ग्राहक का अंदेशा होते ही तस्कर हथियारों से लैस हमला करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आते हैं। पत्रिका रिपोर्टर ने तीन दिन तक नशे के सौदागरों का पीछा कर उनकी काली करतूतों को कैमरे में कैद किया।

तस्कर ने चाकू दिखाकर धमकाया, कोड बताते ही थमा दी स्मैक

स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर स्मैक तस्कर से बोला एक क्वार्टर क्यू चाहिए। इस दौरान तस्कर और उसके साथी ने नए आदमी को देखकर हथियार दिखाकर धमकाते हुए उसे वहां से भागने को कहा। इस पर रिपोर्टर ने उसके परिचित ग्राहक का नाम लेते हुए पहले उसके पास से स्मैक लेकर जाने की बात कही। फिर तस्कर का इशारा मिलते ही उसका साथी सफेद पुड़िया में स्मैक ले आया। इस बीच रिपोर्टर के फोन रिंग बजी और जेब से अपना फोन निकाला तो पास खड़े युवक ने चाकू दिखाकर धमकाते हुए फोन को बंद कर वापस जेब में रखने के लिए बोला। रिपोर्टर बोला-भाई किसी का फोन आया था, इसलिए देख रहा था।

तस्कर बोला- अगली बार आए तो ताका-झांकी मत करना, वरना...

रिपोर्टर - एक क्वार्टर क्यू (स्मैक) चाहिए।
तस्कर - किसने कहा यहां बिकती है।
रिपोर्टर - भाई पहले भी लेकर गए हैं, शायद पहचाना नहीं।
तस्कर - नहीं पहचाना, यहां से निकल ले।
रिपोर्टर- पहले भी लेकर गया हूं, बाहर रहता हूं, इसलिए बहुत दिन बाद आया हूं।
तस्कर - अगली बार सीधा आना। यहां-वहां, ताका-झांकी मत करना, वरना हमको देर नहीं लगेगी।
रिपोर्टर - भाई माल बढ़िया देना, एक क्वार्टर के कितने रुपए देने हैं।
तस्कर- स्मैक पीता है और तुझे भाव नहीं पता नहीं है।
रिपोर्टर- एक क्वार्टर के 400 ही तो देने हैं।
तस्कर- माल कड़क है, 500 रुपए दे और जल्दी निकल, वरना कहीं और से ले लेना।

शहर के इन इलाकों में बिक रहा नशा

काली मोरी के पास, जनता कॉलोनी, काला-कुआं, नयाबास, मालन की गली, अखैपुरा मोहल्ला, लादिया मोहल्ला, कटला में चाह पप्पू मोहल्ला, स्कीम 10-बी, गणेश गुवाड़ी, बुद्धविहार, शिवाजी पार्क, एनईबी और 60 फीट रोड कच्ची बस्ती में खुलेआम स्मैक सहित अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। इन जगहों पर 400 से 600 रुपए में स्मैक का एक क्वार्टर (छोटी पुड़िया) बेची जा रही है। शहर में प्रतिदिन करीब 4-5 लाख की स्मैक बिक रही है।

सभी स्मैक तस्कर आपराधिक प्रवृति के हैं। उनका इलाके में दबदबा होने के कारण स्थानीय लोग शिकायत करने से भी डरते हैं। स्मैक का काला कारोबार कोड से संचालित होता है। ऑनलाइन डिलीवरी के दौरान भी खास कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस जहर की गिरफ्त में फंसकर खासकर युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। हजारों की संख्या में इनके नियमित ग्राहक हैं। इसमें 17 से 30 वर्ष आयु वर्ग युवा सर्वाधिक हैं।

ऐसे तस्करों तक पहुंची पत्रिका टीम

नशे के काले कारोबार को उजागर करने के लिए रिपोर्टर ने सबसे पहले शहर के एक व्यक्ति से संपर्क किया। उसने खतरा बताते हुए कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। बाद में किसी तरह तस्करों की बाइक के नंबर और लोकेशन मिली। इसके आधार पर गुरुवार को रिपोर्टर अशोका टॉकीज के समीप पीडब्ल्यूडी कार्यालय के पास पहुंचा, तो दो तस्कर बाइक के साथ खड़े दिखाई दिए।

इस बीच बाइक सवार दो युवक आए और रुपए देकर सफेद पुड़िया लेकर चले गए। तस्करों ऑनलाइन ऑर्डर भी ले रहे थे। ऑर्डर मिलते ही वे बाइक पर सवार होते और नशे का सामान सप्लाई करने चले जाते। दोनों तस्कर हथियारों से लैस थे। शनिवार को जनता कॉलोनी सहित एक अन्य जगह नशे का कारोबार करने वाले कैमरे में कैद हो गए।

अस्पताल में स्मैक एडिक्शन के प्रतिदिन 2-3 मामले

सामान्य अस्पताल में हर दिन 2-3 तीन मामले प्योर स्मैक एडिक्शन के आ रहे हैं। महीने में करीब 20 से 25 मरीजों को भर्ती किया जा रहा हैं। स्मैक सेवन करने वाले व्यक्ति को स्मैक नहीं मिलने पर उसे मतली आना, मांसपेशियों में दर्द व बेचैनी आदि परेशानियां होने लगती हैं। जिसे परिजन दौरा पड़ना या अन्य कोई बीमारी समझ कर अस्पताल लेकर आते हैं। यहां जांच में स्मैक के सेवन की पुष्टि होने पर उन्हें इसके बारे में पता चलता है। -डॉ. प्रियंका शर्मा, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, सामान्य अस्पताल।

Updated on:
04 Aug 2025 12:40 pm
Published on:
04 Aug 2025 12:39 pm
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