अलवर

सरिस्का वन क्षेत्र में हैं 200 से अधिक पैंथर, बाघ के डर से आबादी में आ रहे भूखे पैंथर, पैंथर को रोकने का ये है एकमात्र उपाय

सरिस्का वन क्षेत्र में 200 से अधिक पैंथर हैं जो बाघ के डर से जंगल छोड़ रहे हैं।
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Apr 09, 2019
Over 200 Panthers In Sariksa Forest Area In Alwar
सरिस्का वन क्षेत्र में हैं 200 से अधिक पैंथर, बाघ के डर से आबादी में आ रहे भूखे पैंथर, पैंथर को रोकने का ये है एकमात्र उपाय

अलवर. जिले में पैंथरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है और सरकार का इनके संरक्षण की ओर से ध्यान ही नहीं जा पाया है। नतीजतन पैंथर आबादी क्षेत्र में लगातार दस्तक दे रहे हैं। अकेले सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र में पैंथरों की संख्या 200 के पार पहुंचने का अनुमान है। संख्या बढऩे से वे अलवर जिला मुख्यालय सहित अन्य आबादी क्षेत्रों में आ रहे हैं। पैंथर जिला मुख्यालय पर दो बार दर्शन दे चुुका है। पास के मालाखेड़ा से भी उसके पकड़ा गया। करीब आधा दर्जन अन्य स्थानों पर भी पैंथर दिखने की चर्चा है।

एक दशक में बढ़ी संख्या

करीब एक दशक पूर्व सरिस्का में 70 पैंथर थे। अब संख्या बढकऱ करीब 200 पहुंच गई है। सरिस्का के अलवर बफर जोन में भी पैंथर तेजी से बढ़े है। यहां एक दशक पूर्व पैंथर की मौजूदगी नगण्य थी, लेकिन अब 20 से ज्यादा पैंथर हैं। जिले के अन्य वन क्षेत्रों में भी 50 से ज्यादा पैंथर होने का अनुमान है।

कोढ़ में खाज बना अतिक्रमण

पैंथरों के इलाके वाले वन क्षेत्र में अतिक्रमण है। ज्यादातर वन क्षेत्र पर पक्के आवास बन चुके हैं। आबादी क्षेत्र का विस्तार पहाड़ी तक होने से पैंथर आबादी के पास रहने को मजबूर है।
मानवीय दखल भी कारण: अलवर के बफर जोन क्षेत्र सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों की संख्या बढऩे से मानवीय दखल तेजी से बढ़ा है।

इलाके की लड़ाई ने बढ़ाया खतरा

जिले के वन क्षेत्रों में पैंथरों की संख्या बढऩे से टैरिटरी का संघर्ष बढ़ गया है। सरिस्का के कोर एरिया में बाघ-बाघिनों का कब्जा है। इससे पैंथरों को पलायन कर पहाडिय़ों की तलहटी में जाना पड़ा। तलहटी में पैंथरों के बीच टैरिटरी को लेकर संघर्ष की घटनाएं होता है क्योंकि वह इलाका छोटा है। ताकतवर पैंथर कमजोर को तलहटी से खदेड़ते हैं तो वे आबादी का रुख कर लेते हैं।

घट रहे हैं संसाधन

जिले में पैंथरों की संख्या बढ़ रही है, वहीं वन कर्मियों के पास रेस्क्यू के संसाधन कम होते जा रहे हैं। पिछले दिनों पैंथरों को रेस्क्यू करने के दौरान वनकर्मियों को चारपाई (खाट) का सहारा लेना पड़ा है। वनकर्मियों के पास हेलमेट का भी अभाव है।

ये है एकमात्र उपाय

सरिस्का व जिले के अन्य वन क्षेत्रों में पहाड़ी बहुतायत में है। इन पहाडिय़ों में छोटी-छोटी पैंथर वैली बनाकर पैंथरों का संरक्षण किया जा सकता है। इससे पैंथरों को आबादी क्षेत्र की ओर आने से रोका जा सकता है।

Published on:
09 Apr 2019 12:22 pm