अलवर

करणी माता के रास्ते में पैंथर

माता के मंदिर तक मादा पैंथर का इलाका, सावधानी से करें दर्शन बच्चों के साथ बाला किला क्षेत्र में कई बार देखी गई  
3 min read
Apr 04, 2019
Panther on the way to karni Mata
करणी माता के रास्ते में पैंथर

अलवर.

नवरात्रि में करणी माता के दर्शन करने जाने वाले भक्तों में पैंथर का खौफ भी रहेगा। सालों पहले मंदिर के आसपास घना जंगल होने के बावजूद पैंथर उसकी सीमा में नहीं आते थे लेकिन, पिछले करीब 20 दिन में दो बार पैंथर शहर के अन्दर ही नहीं आया बल्कि यहां घर और सरकारी कार्यालयों में घुस गया। माना जा रहा है कि सरिस्का के बाघों का इलाका सिलीसेढ़ तक फैल जाने की वजह से पैंथर बफर जोन से बाहर निकलने को मजबूर हैं।

रात में चौकन्ने होकर आएं-जाएं

करणी माता के दर्शन के लिए रात या तडक़े आने-जाने वाले भक्तों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। वैसे तो पैंथर भीड़ होने पर जगह बदल लेता हैं। लेकिन देर शाम और तडक़े पैंथर की गतिविधि बढ़ जाती है। इसलिए पहाड़ी रास्तों से जाते समय सावधानी जरूरी है। करीब 20 दिन पहले स्कीम एक में पैंथर अंधेरी की तरफ से आया। काफी संख्या में भक्त सागर के ऊपर की तरफ से चक्रधारी हनुमान मंदिर होते हुए करणी माता के मंदिर में पहुंचते हैं। अंधेरे में ऐसे रास्तों से जाते समय सावधान रहना होगा। बाला किला बफर जोन में मादा पैंथर के साथ बच्चे भी देखे गए हैं। बच्चे साथ होने से मादा पैंथर बहुत खतरनाक हो जाती है। मादा बच्चों को खतरा मानकर इंसानों पर हमला कर सकती है। वैसे पैंथर एक से अधिक व्यक्ति होने पर खुद ही दूर चले जाते हैं।

चूहड़सिद्ध से ऊपर पानी नहीं

बफर जोन बाला किला में अंधेरी, भूरासिद्ध मंदिर, बाला किला व आसपास के मुख्य रास्तों पर ही पानी की पहुंच है। बाकी जगहों पर पानी की कमी है। पैंथर पानी की तलाश के साथ ही कई बार शिकार के लिए भी जंगल के बाहर तक आ जाते हैं।

गधा, बंदर व कुत्ता पसंदीदा

पैंथर का पसंदीदा शिकार गधा, कुत्ता व बंदर है। कई बार पैंथर शिकार के पीछे शहर में आ जाता है। वैसे भी जंगल के अंन्दर कुत्ते, गधे व बंदर कम हो गए हैं। जहां तक बाघों का सवाल है तो एसटी 11 नामक बाघ बाला किलफोटो... माता के मंदिर तक मादा पैंथर का इलाका, सावधानी से करें दर्शन

बच्चों के साथ बाला किला क्षेत्र में कई बार देखी गई

मेला 6 से
अलवर.नवरात्रि में करणी माता के दर्शन करने जाने वाले भक्तों में पैंथर का खौफ भी रहेगा। सालों पहले मंदिर के आसपास घना जंगल होने के बावजूद पैंथर उसकी सीमा में नहीं आते थे लेकिन, पिछले करीब 20 दिन में दो बार पैंथर शहर के अन्दर ही नहीं आया बल्कि यहां घर और सरकारी कार्यालयों में घुस गया। माना जा रहा है कि सरिस्का के बाघों का इलाका सिलीसेढ़ तक फैल जाने की वजह से पैंथर बफर जोन से बाहर निकलने को मजबूर हैं।

रात में चौकन्ने होकर आएं-जाएं

करणी माता के दर्शन के लिए रात या तडक़े आने-जाने वाले भक्तों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। वैसे तो पैंथर भीड़ होने पर जगह बदल लेता हैं। लेकिन देर शाम और तडक़े पैंथर की गतिविधि बढ़ जाती है। इसलिए पहाड़ी रास्तों से जाते समय सावधानी जरूरी है। करीब 20 दिन पहले स्कीम एक में पैंथर अंधेरी की तरफ से आया। काफी संख्या में भक्त सागर के ऊपर की तरफ से चक्रधारी हनुमान मंदिर होते हुए करणी माता के मंदिर में पहुंचते हैं। अंधेरे में ऐसे रास्तों से जाते समय सावधान रहना होगा। बाला किला बफर जोन में मादा पैंथर के साथ बच्चे भी देखे गए हैं। बच्चे साथ होने से मादा पैंथर बहुत खतरनाक हो जाती है। मादा बच्चों को खतरा मानकर इंसानों पर हमला कर सकती है। वैसे पैंथर एक से अधिक व्यक्ति होने पर खुद ही दूर चले जाते हैं।

चूहड़सिद्ध से ऊपर पानी नहीं

बफर जोन बाला किला में अंधेरी, भूरासिद्ध मंदिर, बाला किला व आसपास के मुख्य रास्तों पर ही पानी की पहुंच है। बाकी जगहों पर पानी की कमी है। पैंथर पानी की तलाश के साथ ही कई बार शिकार के लिए भी जंगल के बाहर तक आ जाते हैं।

गधा, बंदर व कुत्ता पसंदीदा


पैंथर का पसंदीदा शिकार गधा, कुत्ता व बंदर है। कई बार पैंथर शिकार के पीछे शहर में आ जाता है। वैसे भी जंगल के अंन्दर कुत्ते, गधे व बंदर कम हो गए हैं। जहां तक बाघों का सवाल है तो एसटी 11 नामक बाघ बाला किला बफर जोन में करीब छह माह तक रहा। इससे इस इलाके में रह रहे पैंथरों को वह इलाका छोडऩा पड़ा। बाघ की आवाजाही सिलीसेढ़ झील की तरफ भी बढ़ गई है।ा बफर जोन में करीब छह माह तक रहा। इससे इस इलाके में रह रहे पैंथरों को वह इलाका छोडऩा पड़ा। बाघ की आवाजाही सिलीसेढ़ झील की तरफ भी बढ़ गई है।

Published on:
04 Apr 2019 09:12 pm