भारत सरकार के नए वित्त विधेयक और 'वैधता अधिनियम-2025' के विरोध में देशभर के पेंशनर्स में भारी आक्रोश व्याप्त है।
भारत सरकार के नए वित्त विधेयक और 'वैधता अधिनियम-2025' के विरोध में देशभर के पेंशनर्स में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसी क्रम में बुधवार, 25 मार्च को राजस्थान पेंशनर समाज के प्रदेश व्यापी आह्वान पर अलवर जिले के पेंशनर्स ने लामबंद होकर विरोध प्रदर्शन किया। पेंशनर्स ने अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर इस दिन को 'काला दिवस' के रूप में मनाया और जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस नए कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।
जिला अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान बताया कि केंद्र सरकार की ओर से लाया गया यह नया कानून पेंशनर्स के हितों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने जानकारी दी कि वित्त मंत्रालय की ओर से 25 मार्च 2025 को लोकसभा में एक वित्त विधेयक पेश किया गया था, जिसे आनन-फानन में पारित कर 29 मार्च 2025 को नोटिफिकेशन के जरिए कानून बना दिया गया।
पेंशनर समाज का आरोप है कि यह कानून पेंशनर्स के लिए 'काले कानून' के समान है। इस नए अधिनियम के लागू होने के बाद भविष्य में पेंशनर्स को मिलने वाले लाभों (जैसे महंगाई राहत या अन्य बढ़ोतरी) पर पूरी तरह रोक लग सकती है। इतना ही नहीं, यह कानून पूर्व पेंशनर्स के बीच भेदभाव पैदा कर उनके मौजूदा लाभों को समाप्त कर सकता है और एक निश्चित 'फिक्स पेंशन' निर्धारित करने का रास्ता साफ करता है, जो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आर्थिक भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।
अध्यक्ष ने कहा कि विशेष बात यह है कि इन सब विपरीत कारणों के उपरांत भी पेंशनर्स किसी न्यायालय में वाद तक दायर नहीं कर सकेंगे। अध्यक्ष ने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि प्रभावित पेंशनर्स को न्यायालय में अपील करने का अधिकार भी नहीं मिलेगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद रिटायर्ड कर्मचारियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस 'वैधता अधिनियम-2025' को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पेंशनर्स का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर सरकार को उन्हें संबल देना चाहिए, न कि उनके अधिकारों में कटौती करनी चाहिए। ज्ञापन सौंपने के दौरान पेंशनर समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर इस लड़ाई को जारी रखने का संकल्प लिया।