
गोविन्दगढ. एक तरफ शातिर अपराधी नई और हाईटेक गाडिय़ों का प्रयोग कर आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, तो पुलिस की गाड़ी का हाल बेहाल है। खुद पुलिसकर्मी गाड़ी में बैठने से कतराते हैं। रात में गश्त के दौरान भी पुलिस को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आलम है कि ध्क्का मार वाहन में पुलिस को सवार होना पड़ रहा है। ऐसे में अपराधी कैसे पकड़ में आए।
आरोप है कि पुलिस की गाड़ी को तेज स्पीड में भगाओ तो ब्रेक नहीं लगने का डर रहता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक बार अपराधी का पीछा करते समय घुमाव पर पुलिस की गाड़ी बड़ी मुश्किल से कंट्रोल हुई थी। जिसके बाद पुलिस कहीं भी अपराधियों को पकडऩे और दबिश में सरकारी वाहन इस्तेमाल करने से कतरा रही है।
पुलिस पर हमले में किया क्षतिग्रस्त
साइबर क्राइम के आरोपियों को सेमलाखुर्द में गिरफ्तार करने गई पुलिस पर अपराधियों के परिजनों ने हमला कर पुलिस की गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया था। जिसके बाद आज तक पुलिस का वाहन सही होकर वापस गोविंदगढ़ थाने नहीं आया। एक खटारा वाहन गोविंदगढ़ पुलिस को थमा दिया जो कि धक्कामार है। अब सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस तरह से पुलिस अपराधी को पकडऩे में कामयाब हो कैसे हो पाएगी? ऐसे वाहन से क्राइम कंट्रोल कैसे करेंगे ? एक तरफ तो पुलिस क्राइम को लेकर नई रणनीति तैयार करती है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस की गाड़ी ही धोखा दे जाती है।
वाहन की लाइट भी कमजोर
पुलिस का वाहन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। पुलिस वाहन की लाइट कमजोर होने के चलते रात्रि में गश्त के दौरान खासकर बरसात के मौसम में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पुलिस कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर गश्त कर रहे हैं। पुलिस अब उम्मीद लगाई बैठी है कि विधायक अपने कोटे से नया वाहन दे तो अपराध और अपराधियों में नकेल कसने में आसानी होगी। विधायक कोटे से नवसृजित पंचायत समिति को नया वाहन दिया गया था।
नई गाड़ी आते ही कराएंगे उपलब्ध
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे बनने के बाद वीआईपी मूवमेंट बढ़ा है। 7 से 8 गाडिय़ां एस्कॉर्ट में लगी रहती हैं। इसके अलावा नए थाने और पद सर्जित होने से वहां पर भी वाहन दिए हैं। हमने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा हुआ है। जैसे ही नई गाड़ी आएगी, गोविंदगढ़ थाने को मिल जाएगी। क्षतिग्रस्त वाहन के बारे में जानकारी नहीं है। मैं उसकी जानकारी करवा लेता हूं।
आनंद शर्मा, पुलिस अधीक्षक, अलवर