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Alwar: अलवर में 97 डॉक्टर लेते हैं NPA, तो मरीजों से फीस वसूली क्यों?

अलवर के सरकारी अस्पतालों में नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस यानी एनपीए लेने वाले 97 डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस से दूर रहना होता है। जिला अस्पताल के 69 और मेडिकल कॉलेज के 28 डॉक्टर एनपीए ले रहे हैं। इसके बावजूद निजी क्लीनिकों में मरीज देखने और फीस लेने की शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
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alwar government doctors npa

अलवर जिला अस्पताल (representative picture)

सरकारी नौकरी कर रहे डॉक्टराें को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) इसलिए दिया जाता है कि वे निजी प्रैक्टिस न करें, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अलवर के जिला अस्पताल के 69 और मेडिकल कॉलेज के 28 डॉक्टर एनपीए ले रहे हैं। इसके बावजूद एनपीए लेने वाले चिकित्सकों के निजी क्लीनिकों पर मरीजों से परामर्श शुल्क लिए जाने और निजी प्रैक्टिस किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

यदि एनपीए लेने वाला चिकित्सक निजी प्रैक्टिस करता या शुल्क लेता है, तो यह नियमों के विपरीत है। राजस्थान सेवा नियमों में स्पष्ट है कि एनपीए लेने वाला मेडिकल अधिकारी किसी भी रूप में निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकता, केवल आपातकालीन चिकित्सकीय स्थिति में निशुल्क परामर्श व इलाज कर सकते हैं।

20 प्रतिशत एनपीए के बदले निजी प्रैक्टिस पर ‘नो एंट्री’

राज्य में एनपीए मूल वेतन के 20 प्रतिशत की दर से देय है। वर्ष 2026 में राजस्थान सरकार ने सातवें वेतनमान के तहत डीए 58 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया है। यानी एनपीए लेने वाला डॉक्टर निजी प्रैक्टिस का अधिकार छोड़कर सरकारी वेतन-भत्तों का लाभ लेता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने भी मई 2026 के फैसले में स्पष्ट किया कि एनपीए का लाभ निजी प्रैक्टिस नहीं करने की शर्त से जुड़ा है।

अस्पताल में एनपीएधारी डॉक्टर्स की सूची भी गायब

विभागीय निर्देशों के अनुसार, मरीजों की जानकारी के लिए एनपीए लेने वाले चिकित्सकों की सूची अस्पताल में ऐसे स्थान पर प्रदर्शित की जानी चाहिए, जहां वह आसानी से वह दिखाई दे, लेकिन अलवर जिला अस्पताल में फिलहाल ऐसी सूची चस्पा नहीं है। इससे मरीजों को यह पता करना मुश्किल है कि कौन डॉक्टर एनपीए ले रहा है और निजी परामर्श नहीं कर सकता। मरीजों का आरोप है कि ओपीडी समय में कई चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहते। बायोमेट्रिक हाजिरी के बावजूद ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों के अस्पताल से बाहर रहने और निजी क्लीनिक व अस्पतालों में प्रैक्टिस व ऑपरेशन करने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इनका कहना है

मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी के मुख्य द्वार पर एनपीए लेने वाले चिकित्सकों की सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को पता चल सके कि कौन-कौन से चिकित्सक घर पर परामर्श शुल्क नहीं ले सकते। जिन चिकित्सकों के घर या परिसर में लैब अथवा मेडिकल स्टोर संचालित हैं, उनके खिलाफ पीएओ से सूचना प्राप्त होने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पीएमओ या किसी मरीज की ओर से एनपीए का लाभ ले रहे चिकित्सक द्वारा चिकित्सा परामर्श शुल्क लेने की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई के लिए नियमानुसार सरकार को लिखा जाएगा - डॉ. योगेन्द्र शर्मा, सीएमएचओ अलवर