अलवर के सरिस्का में दो फरवरी को मृत मिली बाघिन एसटी-28 की मौत ने तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे सरिस्का प्रशासन कठघरे में है।
अलवर के सरिस्का में दो फरवरी को मृत मिली बाघिन एसटी-28 की मौत ने तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे सरिस्का प्रशासन कठघरे में है। एक्सपर्ट के मुताबिक इस बाघिन का संघर्ष उसकी मां एसटी-14 के साथ होना बताया जा रहा है, जबकि टेरेटरी अलग बनाने व स्थापित होने के बाद मां-बेटी में संघर्ष की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं। साथ ही बाघिन के घुटने पर जो निशान है, उससे उसकी मौत नहीं हो सकती। ऐसे में वन्यजीव प्रेमी तमाम सवाल कर रहे हैं, जिनके जवाब मिले मिले, तो भविष्य के बाघों का संरक्षण और बेहतर हो सकता है।
सरिस्का प्रशासन की ओर से जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि अकबरपुर रेंज नाका पृथ्वीपुरा बीट डाबली के वन क्षेत्र में 2 फरवरी को बाघिन एसटी-28 की मौत टेरिटोरियल फाइट के कारण हो गई। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि जिस बाघिन की मौत हुई, उसकी आयु करीब 5 साल थी। उसकी टेरेटरी पहले ही बन चुकी होगी। उसकी मां एसटी- 14 की आयु भी 8 साल के आसपास रही है। ऐसे में टेरेटरी दोनों की बनी है।
ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई बाघिन 5 साल तक अपनी टेरेटरी नहीं बना पाई हो। टेरेटरी बनाने के बाद ही नामकरण भी होता है। ऐसे में सरिस्का के दावे एक्सपर्ट हवाई बता रहे हैं। उनका कहना है कि मां-बेटी का संघर्ष 2 से 3 साल की आयु के दौरान हो सकता है, लेकिन बाद में संभावनाएं नहीं रहती हैं। इस संबंध में क्षेत्र निदेशक व डीएफओ से संपर्क नहीं हो सका।
कोबरा के कारण भी मौत हो सकती है या फिर किसी पशु को प्वाइजनिंग देकर छोड़ा गया हो, जिसका शिकार करने के बाद बाघिन की मौत हुई हो? यह जांच का विषय है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।