
सावधान, अगर आपको कुत्ता या बंदर काट ले तो इस बात की उम्मीद मत कीजिए की आपको सरकारी अस्पताल में इलाज मिल जाएगा। क्योंकि जिले में डॉग बाइट के मामले ज्यादा आने के कारण इंजेक्शन आते ही खत्म हो जाते हैं। इंजेक्शन की परेशानी होने के बावजूद चिकित्सा विभाग को इसके लिए मुख्यालय की ओर से कोई बजट नहीं दिया जा रहा है । इंजेक्शन की कमी के चलते चिकित्सा प्रशासन को स्वयं के स्तर से थोड़े बहुत इंजेक्शन मंगवाने पड़ते हैं। जो आते ही खत्म हो जाते हैं।
अलवर जिले के सामान्य अस्पताल में प्रति दिन 80 से 90 मामले डॉग बाइट के आ रहे है। सामान्य चिकित्सालय में पिछले चार दिनों से एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं हैं। ऐसे में डॉग बाइट का शिकार हुए लोग सुबह से शाम तक इंजेक्शन लगवाने के लिए भटकते रहते हैं। एक बार डॉग बाइट का शिकार होने के बाद 5 इंजेक्शन लगवाए जाते हैं। जबकि अकेले अलवर शहर में करीब 2 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं।
कुत्ते के काटने से मौत भी
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व गोविंदगढ़ में एक बालक की डॉग बाइट का शिकार होने के कारण मौत भी हो चुकी है। इधर नगर परिषद की ओर से भी पूर्व में श्वानों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए कुछ इंतजाम किए थे, लेकिन वो सब कागजी ही साबित हुए। हकीकत यह है कि आम आदमी डाग बाइट का शिकार हो रहा है।
एक साल में 7526 मामले आए सामने
अलवर जिले में वर्ष 2018 में कुल 7526 मामले डॉग बाइट के सामने आए। जबकि वर्ष 2017 में 6837 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा दो - दो मामले कैट बाइट, पिग बाइट आदि के भी आए हैं।
कहीं पर भी नहीं है
यहां पर अलवर ही नहीं बल्कि दौसा, बहरोड़, राजगढ़, नगर, डीग ,भरतपुर, गोपालगढ़ सहित अन्य जगहों से लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आ रहे हैं।
नहीं मिले इंजेक्शन
केस-1: जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवान आए बुर्जा के रहने वाले आसिफ ने बताया कि उनके दो इंजेक्शन लग चुके हैं लेकिन आज इंजेक्शन नहीं होने की वजह से वापस जाना पड़ रहा है।
केस-2: चमेली बाग से आई रामवती ने भी बताया कि कुत्ते के काटने से पैर में काफी दर्द है लेकिन आज सुबह तक इंजेक्शन नहीं आए इसलिए वापस आना पडेग़ा।