
शहर से राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय की ओर जाने वाला करीब 20 किलोमीटर लंबा मुख्य रास्ता इन दिनों राहगीरों के लिए मुसीबत बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। हालात यह हैं कि विश्वविद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते में करीब 100 से अधिक बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। बारिश के बाद कई गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता। वाहन चालक बचने के प्रयास में कई बार संतुलन खो रहे हैं।
यह रास्ता सिर्फ विश्वविद्यालय तक जाने का मार्ग नहीं है, बल्कि 50 से अधिक गांवों के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है। विश्वविद्यालय के शिक्षक-कर्मचारी और विद्यार्थी इसी रास्ते से आते-जाते हैं। इसके अलावा करीब 90 से 100 सरकारी स्कूलों का स्टाफ भी इसी मार्ग से अलग-अलग स्कूलों तक पहुंचता है। ऐसे में सुबह और दोपहर के समय इस सड़क पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है।
भजीट में तीन जगह हालात सबसे खराब
अलवर के भजीट गांव के पास तीन स्थानों पर सड़क पर पानी जमा है। इन जगहों पर बारिश के बाद ही नहीं, कई बार बिना बारिश के भी पानी भरा रहता है। पानी के नीचे सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देने से दोपहिया वाहन चालक अचानक गिर जाते हैं। कई वाहन गड्ढों में फंसने के कारण यातायात भी प्रभावित होता है।
बचने के चक्कर में बढ़ रहा हादसों का खतरा
सड़क पर गड्ढों की संख्या बढ़ने से वाहन चालकों को एक-दूसरे से बचते हुए आगे निकलना पड़ता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक खतरनाक है। सामने से आने वाले वाहन को जगह देने या गड्ढे से बचने के दौरान संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वाहन चालक हादसे का शिकार हो चुके हैं।
रोज निकलते हैं हजारों लोग और वाहन
इस मार्ग से प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इनमें स्कूल जाने वाले बच्चे, शिक्षक, कर्मचारी, ग्रामीण, विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और आम वाहन चालक शामिल हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की रफ्तार कम रहती है और सफर में भी अधिक समय लगता है।
न निर्माण हुआ, न स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से खराब है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। जगह-जगह गड्ढों की मरम्मत के बजाय समस्या जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में स्थिति और बिगड़ जाती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क का सर्वे करवाकर गड्ढों को भरने के साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्से का स्थायी पुनर्निर्माण कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों और आमजन की आवाजाही सुरक्षित हो सके।