भिवाड़ी में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक लिपिक के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि लिपिक ने कोर्ट में पेश की जाने वाली डंपर की रिपोर्ट बनाने के एवज में रुपयों की डिमांड की थी। हालांकि आरोपी ने बाद में रिपोर्ट जारी कर दी थी, लेकिन एसीबी ने पुख्ता कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी भिवाड़ी ने वन विभाग के एक लिपिक (Clerk) के विरुद्ध रिश्वत मांगने के ठोस सबूतों के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला नवंबर 2025 का है, जिसमें तिजारा पंचायत समिति के ग्वालदा निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसका एक डंपर चौपानकी थाना पुलिस ने पकड़ा था, जिसे बाद में वन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया था। डंपर को रिलीज करवाने के लिए परिवादी ने भिवाड़ी कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया। कोर्ट ने इस पर अलवर वन विभाग से एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की। आरोप है कि इसी रिपोर्ट को तैयार करने और कोर्ट में भेजने के नाम पर वन विभाग में कार्यरत लिपिक प्रसून सैनी ने परिवादी से 35 हजार रुपए की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी भिवाड़ी की टीम ने जाल बिछाया। मोलभाव के बाद लिपिक 30 हजार रुपए लेने पर सहमत हुआ। तय हुआ कि 20 हजार रुपए तुरंत दिए जाएंगे और बाकी 10 हजार रुपए दो-तीन दिन बाद। एसीबी ने परिवादी को एक डिजिटल रिकॉर्डर देकर लिपिक के पास भेजा। अलवर के शिवाजी पार्क क्षेत्र में हुई बातचीत और पैसों के लेन-देन की चर्चा रिकॉर्डर में कैद हो गई। इसके तीन दिन बाद जब परिवादी ने लिपिक को कॉल किया, तो उसने राजगढ़ में होना बताया और फोन पर भी पैसों को लेकर चर्चा की। यह कॉल रिकॉर्डिंग भी एसीबी के लिए अहम सबूत बन गई।
हैरानी की बात यह है कि लिपिक ने संभवतः एसीबी की भनक या खतरे को भांप लिया था, जिसके चलते उसने बिना पैसे लिए ही डंपर की रिपोर्ट जारी कर दी और डंपर कोर्ट से रिलीज भी हो गया। लेकिन कानून की नजर में 'रिश्वत की मांग' करना ही अपराध है। एसीबी ने वॉइस सैंपल्स और रिकॉर्डिंग की जांच के बाद लिपिक प्रसून सैनी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आ रहा है कि वन विभाग में डंपर या अन्य वाहनों से जुड़ी रिपोर्ट केवल एक लिपिक के स्तर पर नहीं बनती, इसमें उच्चाधिकारियों की सहमति और हस्ताक्षर भी होते हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस रिश्वत के खेल में विभाग के कुछ और 'बड़े खिलाड़ी' भी शामिल थे? एसीबी अब इस बिंदु पर भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या रिश्वत की यह रकम ऊपर तक बांटी जानी थी।