राजस्थान में जनगणना-2027 के महाभियान का आगाज आज यानी 1 मई से शुरु हो गया है। अलवर सहित पूरे प्रदेश में 14 जून तक पहले चरण के तहत मकानों की सूची बनाने और उनकी गणना का काम किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार सरकार ने नागरिकों को 'स्वगणना' यानी खुद पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने का भी विकल्प दिया है।
राजस्थान में भविष्य की योजनाओं और विकास का खाका तैयार करने वाली जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों से इस राष्ट्रीय कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनगणना कर्मी जब आपके द्वार आएं, तो उनका स्वागत करें और बिना किसी हिचक के सही जानकारी साझा करें, क्योंकि आपके द्वारा दिया गया एक-एक सही आंकड़ा ही राज्य के बेहतर कल की नींव रखेगा।
इस बार की जनगणना आधुनिक तकनीकों से लैस है। 1 मई से 15 मई तक 'स्वगणना' का विशेष चरण चलाया जा रहा है। अगर आप चाहते हैं कि आपको घर आए कर्मचारी को समय न देना पड़े, तो आप खुद आधिकारिक पोर्टल https://censusindia.gov.inपर जाकर अपनी और अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।
अलवर की जिला कलेक्टर और प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. आर्तिका शुक्ला ने बताया कि जनगणना एक प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया है। इसी डेटा के आधार पर आगामी वर्षों में संसाधनों का बंटवारा, आरक्षण और नई नीतियां तय होंगी। राजस्थान जैसे भौगोलिक विविधता वाले राज्य में हर एक घर तक पहुंचना बड़ी चुनौती है, जिसे आमजन के सहयोग से ही पूरा किया जा सकता है।
पहले चरण (हाउस लिस्टिंग) के दौरान जनगणना कर्मी आपके घर की भौतिक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में करीब 31-34 सवाल पूछेंगे।
मकान की बनावट: दीवार, छत और फर्श में किस सामग्री (सीमेंट, पत्थर, ईंट या मिट्टी) का उपयोग हुआ है।
सुविधाएं: घर में पीने के पानी का स्रोत क्या है, बिजली का कनेक्शन है या नहीं, और शौचालय व स्नानघर की स्थिति क्या है।
रसोई और ईंधन: एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन और खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मुख्य ईंधन की जानकारी।
डिजिटल और वाहन: घर में रेडियो, टीवी, लैपटॉप, इंटरनेट, मोबाइल फोन, साइकिल या कार जैसे साधनों की उपलब्धता।
परिवार की जानकारी: मुखिया का नाम, जेंडर, जाति वर्ग, सदस्यों की संख्या और मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह डेटा पूरी तरह गोपनीय रहता है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और जन कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाता है। इसलिए किसी भी भ्रामक खबर पर ध्यान न दें और जनगणना में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।