अलवर

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस वजह से गड़बड़ाई प्रमुख दलों की रणनीति, जानिए क्या है समस्या

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Nov 21, 2018
Rajasthan Congress And Bjp Trying To Manage Baagi Leaders
राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस वजह से गड़बड़ाई प्रमुख दलों की रणनीति, जानिए क्या है समस्या

अलवर. विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से बागी होकर चुनाव लड़ रहे नेताओं की ओर से ऐनवक्त पर दूसरे दलों का दामन थाम लेने से कांग्रेस व भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों की डेमेज कंट्रोल की रणनीति गड़बड़ा गई है। इस बार दोनों ही दलों के कई नेता टिकट नहीं मिलने से बागी होकर दूसरे दलों के सहारे चुनाव मैदान में कूद चुके हैं।
विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन का दौर पूरा होने के साथ ही कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेताओं ने डेमेज कंट्रोल की रणनीति के तहत अपने बागी उम्मीदवारों से सम्पर्क साधना शरू कर दिया है। इस बार कांग्रेस को बहरोड़, किशनगढ़बास व कठूमर, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, तिजारा, मुण्डावर में अपने ही बागी उम्मीदवार से जूझना पड़ रहा है।

वहीं भाजपा के लिए तिजारा, कठूमर, अलवर शहर, थानागाजी, बानसूर आदि विधानसभा क्षेत्र में अपने ही नेताओं ने मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। इन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के नेता दूसरे दलों से चुनाव मैदान में उतर गए हैं, या फिर निर्दलीय खम ठोक रहे हैं।

प्रमुख दलों के लिए यह है परेशानी

कांग्रेस व भाजपा के लिए परेशानी यह है कि पार्टी के जो नेता दूसरे दलों के सिम्बल पर चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें डेमेज कंट्रोल कर समझाना मुश्किल है। इनमें से ज्यादातर नेता पार्टी छोडकऱ दूसरे दलों की सदस्यता ग्रहण कर चुक हैं। ऐसे में उन्हें बीच चुनाव में दूसरे दलों से तोडकऱ वापस अपने दल में लाना आसान काम नहीं है। ऐसी स्थिति में दोनों ही दलों के नेताओं का जोर अब चुनाव मैदान में निर्दलीय चुनाव लड़ रहे नेताओं पर है। पार्टी के बड़े नेता मंगलवार को ऐसे नेताओं से किसी न किसी तरह सम्पर्क साधने में जुटे रहे, लेकिन फिलहाल दोनों में से किसी भी दल को सफलता नहीं मिल पाई। हालांकि चुनाव रणनीतिकारों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है और मनुहार कर उन्हें किसी तरह चुनाव मैदान से दूर कर अपने दल के प्रत्याशी की राह आसान करने के प्रयास में जुटे हैं।

इस बार चुनाव समस्या दूसरी

इस बार चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के लिए समस्या पिछली बार से अलग है। इस बार दोनों ही दलों के कुछ बड़े नेता बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्हें मना पाना पार्टी नेताओं के लिए आसान नहीं है। पूर्व में ज्यादातर छोटे स्तर के नेता चुनाव मैदान में निर्दलीय उतरते थे, जिन्हें किसी तरह मना कर बिठाना आसान होता था।

नाम वापसी तक जारी रहेंगे प्रयास

प्रत्याशियों के नाम वापसी की निर्धारित समय सीमा तक प्रमुख दलों के नेता बागी नेताओं को मनाने में जुटेंगे, लेकिन 22 नवम्बर को दोपहर 3 बजे तक ही प्रत्याशी नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद प्रत्याशी नाम वापस नहीं ले पाएंगे। इस कारण दोनों ही दलों के नेताओं ने डेमेज कंट्रोल के प्रयास तेज कर दिए हैं।

Published on:
21 Nov 2018 06:28 pm