
. राजपूताना से राजस्थान बने प्रदेश का गौरवमयी इतिहास रहा है। सात चरणों में बने राजस्थान का वर्तमान स्वरूप एक नवम्बर 1956 को सामने आया। राजस्थान के इस वर्तमान स्वरूप को अस्तित्व में आने के लिए अलवर का विशेष योगदान रहा है।
15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तब अलवर राज्य के राजा तेजसिंह थे और नीमराणा के राजा राजेंद्र सिंह थे। 30 गांव का नीमराणा मई 1948 में तत्कालीन राजा राजेंद्र सिंह ने मत्स्य राज्य संघ में विलय किया। शाहजहांपुर, बाबड़ी, चौबारा, संसदी, फौलादपुर, गांव गुडग़ांवा जिला पंजाब से अलवर जिले में शामिल किए गए। अलवर महाराजा को प्रीविपर्स सालाना 5 लाख 20 हजार रुपए एवं नीमराणा राजा को 15 हजार रुपए प्रतिवर्ष नियत किए गए।
इतिहासविद् हरिशंकर गोयल ने बताया कि भारत के उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सबसे पहले राजस्थान के निर्माण के लिए अलवर से ही आरंभ किया। 3 फरवरी 1948 को महाराजा तेजसिंह व प्रधानमंत्री एनबी खर्रे को बुलाकर देहली हाउस में गिरफ्तार कर लिया और राजा ने खर्रे को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया। पांच फरवरी को रेडियो पर प्रसारित हुआ कि महाराजा अलवर को देहली शहर में रहने का हुक्म हुआ है और अलवर के दीवान पर दिल्ली नगर के मजिस्ट्रेट ने शहर से बाहर जाने की पाबंदी लगा दी है। पांच फरवरी को अलवर रियासत को राजा ने भारत सरकार को सौंप दिया तब 6 फरवरी 1948 को प्रशासक के रूप में सेठ केबीलाल आईसीएस प्रशासक और उनके सलाहकार लाला काशीराम गुप्ता एवं बाबू शोभाराम नियुक्त किए गए। यह प्रशासन मत्स्य संघ बनने पर 18 मार्च 1948 तक चला।
इतिहासविद् हरिशंकर गोयल ने बताया कि अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली रियासतों को मिलाकर मत्स्य संघ बना। मत्स्य संघ का विलय 15 मई 1949 को राजस्थान राज्य में हुआ था। मत्स्य संघ में धौलपुर महाराजा को संघ का राज प्रमुख भरतपुर महाराजा को उप राजप्रमुख बनाया गया और अलवर को राजधानी बनाया गया। बाबू शोभाराम मुख्यमंत्री (प्रधानमंत्री), जुगल किशोर चतुर्वेदी (भरतपुर), मंगलसिंह टांक (धौलपुर), मास्टर भोलानाथ (अलवर), गोपीलाल यादव (भरतपुर) और चिरंजीलाल शर्मा (करौली) को मंत्री बनाया गया। राजस्थान के निर्माण के 7 चरण हुए हैं जिसके पांचवे चरण में संयुक्त वृहत् राजस्थान 15 मई 1949 में बना जिसमें मत्स्य संघ को शामिल किया गया।
देश आजादी की बांटी मिठाई, पहले से ही प्रजातंत्र
नीमराणा के राजा राजेंद्र सिंह ने नीमराणा में 15 अगस्त 1947 को राष्ट्रीय झंड़ा फहराकर रोशनी की और जनता में मिठाई बांटी। अलवर राज्य के झंडे के साथ राष्ट्रीय तिरंगा झंड़ा फहराया गया था। 18 अगस्त 1947 को राजा राजेंद्र सिंह ने घोषणा की कि प्रजा पंचायत नीमराणा राज्य का विधान बनाकर राज्य चलाएंगे। 30 गांव के इस राज्य को प्रजातांत्रिक समाजवादी स्टेट बनाने का संकल्प घोषित किया गया जिसमें हर गांव से एक चुना हुआ प्रतिनिधि प्रजा पंचायत का सदस्य होगा और राज्य में 4 मंत्री होंगे। बाद में इसे मत्स्य संघ में शामिल किया गया।
पटेल ने राजर्षि कॉलेज मैदान में दिया था भाषण
25 फरवरी 1948 को सरदार वल्लभ भाई पटेल अलवर आए और राजर्षि कॉलेज ग्राउंड में उन्होंने भाषण दिया। इसी प्रकार 9 मार्च 1948 को भरतपुर का शासन केन्द्र ने अपने हाथ में ले लिया लेकिन भरतपुर महाराजा को भरतपुर रहने की आज्ञा दे दी । इधर रियासती विभाग देश भर की रियासतों का एकीकरण की योजना को ध्यान में रखते हुए राजस्थान की रियासतों की समस्या को हल करने में सक्रिय रहा। इसी दिशा में महाराजा धौलपुर ने स्वत: ही यह कदम उठाया और धौलपुर को विलय करने की स्वीकृति दे दी साथ ही करौली भी भारत संघ में आ गया और 10 मार्च 1948 को अलवर-भरतपुर-धौलपुर-करौली का संयुक्त राज्य मत्स्य संघ के नाम से घोषित हो गया।