Rajasthan Farmers : इजराइल की एक तकनीक ने राजस्थान के किसानों की किस्मत बदल दी है। अब अलवर, कोटपुतली-बहरोड़ के किसान कम खर्च में बंपर पैदावार कर खूब मुनाफा कमा रहे हैं। जानें पूरा मामला।
Rajasthan Farmers : पानी के संकट से जूझते अलवर, कोटपुतली-बहरोड़ के किसान अब इजराइल की बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) को अपनाने लगे है। कम पानी में ही इससे अच्छी पैदावार ले रहे हैं। कोटपूतली-बहरोड़ जिले में किसानों ने बागों के अलावा सब्जियों के खेतों में इस तकनीक का प्रयोग किया है।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर के बामनवास कांकड़ व निवासी किसान योगेंद्र सिंह ने 10 बीघा में बेर का बाग लगाया है। यह पौधे झारखंड से मंगवाए हैं। उन्होंने बताया कि पानी की कमी है। इसलिए बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक को अपनाया। इसके लिए पूरे खेत में फिटिंग करवाई। अब पानी हर बेर के पौधे की जड़ों में जा रहा है। बाग में हरियाली बढ़ रही है। यह बेर के पौधे जैविक तरीके से लगाए गए हैं।
किसान योगेंद्र सिंह की तकनीक को देखकर अब बलबीर स्वामी, राघव आदि किसान इसे अपनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूमि के गिरते जल स्तर में यह पद्धति कारगर है। कम पानी में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक का आधुनिक विकास मुख्य रूप से इजराइल में हुआ था। यह पौधों की जड़ों में पाइप के जरिए सीधे पानी टपकाती है, जिससे पानी की 70 प्रतिशत तक बचत होती है। पैदावार बढ़ती है। उर्वरक सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं। इसका उपयोग फलदार पेड़ों व सब्जियों की खेती में बहुत प्रभावी है।
1- कम पानी वाले एरिया में यह पद्धति कारगर हो जाती है। पानी की बचत होती है। वाष्पीकरण और रिसाव कम होता है।
2- पानी सीधे जड़ों में मिलने से फसल स्वस्थ रहती है। उत्पादन 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
3- पानी के साथ तरल खाद दी जा सकती है, जिससे खाद की 40 प्रतिशत तक बचत होती है।
4- केवल पौधों के पास पानी मिलने से बीच की जगह सूखी रहती है। जिससे खरपतवार कम उगते हैं।
5- कम पानी की आवश्यकता और स्वचालन के कारण मजदूरी की लागत कम होती है।
6- ऊबड़-खाबड़ जमीन के लिए उपयुक्त है। यह तकनीक असमान भूमि और रेतीली मिट्टी में भी बहुत कारगर है।