अलवर

Alwar: किसान चिंतित… खेत में बुवाई से लेकर मंडी तक फसल लाना हुआ महंगा

किसान पर महंगाई की मार पड़ी है। डीजल महंगा होने से सिंचाई, जुताई, रोपाई और कटाई जैसे अधिकांश कृषि कार्यों पर अब किसानों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। पहले ही कर्ज के बोझ तले पड़ा किसान इससे और ज्यादा परेशान होगा।
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Jun 09, 2026
farming
ट्रैक्टर से खेत में जुताई करता किसान

अलवर​ जिले में इस महीने खरीफ की फसल बुवाई शुरू हो जाएगी। डीजल के दामों का असर इस पर साफ पड़ेगा। सिंचाई, जुताई, रोपाई और कटाई जैसे अधिकांश कृषि कार्य डीजल आधारित मशीनों पर निर्भर हैं, इसलिए ईंधन महंगा होने का असर सीधे उत्पादन लागत पर दिखाई देगा। बाजरा व कपास की फसल में औसतन 80 से 100 लीटर डीजल की खपत होती है। ऐसे में बढ़ी हुई कीमतों के प्रति बीघा 400 से 500 रुपए तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। फसल कटाई के बाद उसे मंडी तक लाने वाले वाहनों का का भी किराया बढ़ गया है, ऐसे में किसान की आय पर सीधा असर नजर आएगा। इससे किसान चिंतित है। गौरतलब है कि खरीफ सीजन में अलवर में कपास, बाजरा, मक्का, ग्वार, ज्वार सहित कई फसलों की खेती की जाती है। अलवर की ज्यादातर आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है।

यूं होता है पैसा खर्च

बीज के लिए प्रतिबीघा करीब 1000 से 1500, खेत की जुताई पर 1500, खाद व उर्वरकों पर करीब 1500, कीटनाशकों पर लगभग 1000, सिंचाई पर दो से तीन हजार रुपए, कटाई पर 5500 रुपए खर्च होते हैं। डीजल महंगा होने से इनमें विशेष रूप से जुताई, सिंचाई और कटाई से जुड़े खर्च बढ़ेंगे। ज्यादातर किसानों ने ब्याज पर कर्ज ले रखा है। हर बार मौसम खराब होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है, ऐसे में यह नया बोझ उनकी कमर तोड़ सकता है।

जहां डीजल पंपों का प्रयोग, वहां ज्यादा खर्च

वैसे तो जिले में ज्यादातर जगहों पर बिजली संचालिक पंप का ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन बिजली कम आने की वजह से कई इलाकों में डीजल पंप से ही सिंचाई की जाती है। थानागाजी, कठूमर इलाकों में डीजल पंपों का प्रयोग ज्यादा होता है।

किसान की मुनाफा होगा कम

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि लागत बढ़ने से किसानों की आय और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। यदि उत्पादन लागत में वृद्धि के अनुपात में फसलों के दाम नहीं बढ़ते हैं, तो किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। खरीफ सीजन के दौरान डीजल मूल्य वृद्धि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पहले से ही खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

Updated on:
09 Jun 2026 11:05 am
Published on:
09 Jun 2026 11:05 am