
विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार कांग्रेस सख्ती के मूड में है। यही कारण है कि चुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारने के लिए पार्टी के आला नेताओं में टिकट वितरण की गाइड लाइन को लेकर गहन मंथन में जुटी है। पार्टी के टिकट दावेदारों की चिंता है कि यही मंथन नियमों में तब्दील हुआ तो जिले में आधे से ज्यादा मजबूत दावेदार टिकट की दौड़ से ही बाहर जाएंगे। ऐसे में विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति गड़बड़ा सकती है।
राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द होने की संभावना देख कांग्रेस समेत अन्य प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण होने के कारण पार्टी नेता टिकट वितरण को लेकर इस बार गंभीर है। चुनाव में मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए पार्टी की ओर से दावेदारों के नाम के तीन सर्वे कराए गए हैं। वहीं ब्लॉक व जिला संगठन से भी जिताऊ दावेदारों का पैनल मांगा गया है। इन पैनलों में तीन से पांच दावेदारों के नाम शामिल है।
यदि मंथन का दौर नियमों में बदला तो
विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस में मानक तय करने को लेकर चल रहा मंथन या इनमें से कुछ गाइडलाइन नियम में तब्दील हुई तो अलवर जिले में कांग्रेस की चुनावी तस्वीर बदली दिखाई पड़ सकती है। यदि सभी गाइड लाइन नियमों में बदल जाए तो जिले में सांसद डॉ. करणसिंह यादव, पूर्व सांसद जितेन्द्र सिंह, जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव जुबेर खान, पूर्व विधायक जौहरीलाल मीणा, रमेश खींची, कृष्णमुरारी गंगावत, गत विधानसभा चुनावों में पार्टी प्रत्याशी रहे नरेन्द्र शर्मा, दीपचंद खैरिया, अधिक उम्र में दुर्रुमियां, पांच साल पार्टी में काम करने की बंदिश में बलजीत यादव, डॉ. आरसी यादव आदि नेताओं को भी टिकट की दौड़ से बाहर होना पड़ सकता है।
नए चेहरों में उत्साह
कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर चल रहे मंथन ने पुराने नेताओं की नींद उड़ा रखी है, लेकिन टिकट के नए दावेदारों में गाइडलाइन पर मंथन को लेकर उत्साह है। कांग्रेस टिकट की कतार में लगे नए चेहरों को उम्मीद है कि इस बार विधानसभा चुनाव के लिए नए मानक तय होंगे। इससे उनकी टिकट मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
प्रत्याशी चयन के लिए गाइड लाइन पर चर्चा
विधानसभा चुनाव में इस बार पार्टी आलाकमान की ओर से प्रत्याशी चयन के लिए गाइडलाइन तय करने के लिए लंबे समय से मंथन का दौर चल रहा है। पार्टी में जिन गाइड लाइन पर चर्चा चल रही है, उनमें एक ही सीट से दो बार हारे प्रत्याशी को टिकट नहीं देने, करीब 35 प्रतिशत उम्मीदवार 50 साल से कम उम्र के प्रत्याशियों को देने, महिलाओं को कम से कम 15 प्रतिशत टिकट देने, पूर्व व वर्तमान सांसद को भी विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं देने, जिलाध्यक्षों को चुनाव नहीं लड़वाने, 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को प्रत्याशी नहीं बनाने एवं पार्टी में कम से कम पांच साल तक काम करने वाले कार्यकर्ता को ही प्रत्याशी बनाने आदि गाइडलाइन पर गहन मंथन किया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर अंतिम रूप से मानक तय नहीं किए हैं, लेकिन गाइडलाइन की चर्चा से ही टिकट के दावेदारों की नींद उड़ी पड़ी है।