अलवर

जिले की आर्थिक व्यवस्था का आधार है लाल प्याज

परम्परागत फसल के साथ प्याल को फसल को दे रहे प्राथमिकतालाल प्याज कर रहा किसानों को निहाल

2 min read
Nov 13, 2021
जिले की आर्थिक व्यवस्था का आधार है लाल प्याज

अलवर. अलवर जिले की आर्थिक व्यवस्था लाल प्याज पर टिकी है। जिले की आर्थिक उन्नति का आधार लाल प्याज होने से किसानों का इस फसल पर अधिक ध्यान रहता है। परम्परागत फसल के साथ किसान लाल प्याज की फसल को प्राथमिकता दे रहा है। जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में लाल प्याज की बुवाई की जाती है और इस प्याज से किसान हर साल निहाल हो रहे हैं।
गत वर्षों में पूरे देश में प्याज के भाव बढ़े और इसी आस में किसानों ने अच्छा मुनाफा कमाने की उद्देश्य से किसान बहुतायत मात्रा में प्याज की बुवाई की है। मेवात अंचल में किसानों ने हर वर्ष प्याज की फसल को प्राथमिकता से बोया है। गत वर्षो में देश के कई राज्यों में बाढ़ आने के कारण अलवर जिले की प्याज की मांग पूरे देश में थी और प्याज ने किसानों को निहाल कर दिया था। इस बार किसान को प्याज की नकदी फसल से अच्छी आस है। शुक्रवार को भी अलवर जिले की प्याज मण्डी में प्याज की बम्पर आवक हुई है।
प्याज बीज की दरों में हुई बढ़ोतरी
वर्ष 2018 में प्याज का बीज 2800 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल बिका था। वर्ष 2019 में बढकऱ 4000 से 4200 रुपए तक पहुंचा गया और वर्ष 2020 में 4500-5000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था। औसत प्याज का बीज लगभग 5000-6000 रुपए प्रति क्विंटल है। ऐसे में गत तीन सालों में एक क्विंटल बीज की कीमत में 2000 से 3000 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। किसान को एक हैक्टेयर भूमि के लिए कम से कम 25 क्विंटल बीज की आवश्यकता पड़ती है। प्याज की बुवाई और फसल तैयार होने तक मजदूरी, खाद और दवाई का खर्चा 1 हैक्टेयर पर करीब 50 से 60 हजार रुपए बैठता है।


कीमत बढऩे से रकबा बढ़ा
बानसूर क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से क्षेत्र के किसान प्याज की पैदावार करने में लगे हैं। इसके लिए किशनगढ़बास एवं खैरथल नर्सरी से प्याज का बीज लाकर प्याज पैदा की जा रहीं है। किसानों ने पिछले दो वर्षो से कपास एवं ग्वार का रकबा घटाकर मुनाफा कमाने के लिए प्याज का रकबा बढ़ा दिया।


एक बीघा में 70 से 80 हजार का खर्चा
अलवर जिले में किसानों ने लाल प्याज की अच्छी बुवाई की है। खैरथल के नाम से अस्सी के दशक में दिल्ली सहित देश-विदेशों में पहचान रखने वाली लाल प्याज अब अलवर के नाम से देश भर में अपनी पहचान बना चुकी है। जिले में अगस्त-सितंबर में लाल प्याज की बुवाई की जाती है। इस वर्ष जिले में प्याज की बम्पर बुवाई की है, जिससे अलवर के प्याज व्यापारियों और किसानों को मोटा मुनाफे की उम्मीद है। जिले में इस बार किसानों को एक बीघा प्याज की फसल बोने में करीब 70 से 80 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से खर्चा हो रहा है।

Published on:
13 Nov 2021 01:46 am
Also Read
View All