
राजस्थान के अलवर जिले में गोविन्दगढ़ उपखंड के इलाके में मौजूद गोचर में बेर की झाडिय़ां लाल रंग के बेरों से लकदक नजर आ रही है। गोचर के बीच से गुजर रही सडक़ से होकर निकलने वाले वाहनों में सवार लोग सडक़ किनारे अपने वाहन खड़े कर इन झाडिय़ों से बेर तोड़ इनके स्वाद का लुत्फ उठाते देखे जा सकते हैं।
खाने में स्वादिष्ट व औषधीय गुणों से भरपूर पके हुए लाल बेर स्वास्थ्य के लिए लाभदयी फल है। शबरी के बेर का वर्णन तो रामायण में सर्वविदित है। वेद, पुराण व अन्य धार्मिक ग्रन्थों में भी इसका महत्व बताया गया है। इसका वनस्पतिक नाम जिजिफस मोरीसियाना है। इन दिनों महिलाओं व बच्चों के समूह झाडियों के इर्द-गिर्द बेर तोड़ते व खाते हुए देखे जा सकते हैं। हल्के खट्टे व मीठे स्वाद वाले ये लाल बेर हर किसी के मन को भाते हैं और खाने को लालायित रहते हैं।
हाथखर्ची का भी जरिया
बारिश ऋतु समाप्त होने व सर्दी की शुरुआत होने के साथ ही झाडिय़ों पर ये बेर आना शुरू हो जाते हैं। बिना पानी व किसी मेहनत के खेतों व नम भूमि में पनपने वाली झाडिय़ों के लगने वाले बेर अब किसानों व ग्रामीणों के लिए आमदनी का जरिया भी बन रहे हैं। खट्टे मीठे लाल रंग के बेरों को खाने के लिए विशेषकर बच्चे लालायित रहते हैं। गांवों में ग्रामीण महिलाओं से लेकर पुरुष भी झाडिय़ों के बेर तोडकऱ इक_े करते देखे जा सकते हैं। लोग बाजार में बेचकर अपनी हाथखर्ची भी जुटा रहे हैं।
पौष्टिक तत्वों से भरा है बेर का फल
चिकित्सा विशेषज्ञो आदि ने बताया कि झाडिय़ों पर लगने वाला बेर का फल पौष्टिक तत्वों से पूर्ण है। इसके अंदर विटामिन, खनिज, लवण व शर्करा आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके गुण हिमालय के सेव से कहीं कम नहीं हैं। बेर के फल में स्टार्च, शर्करा, कैल्सियम, फॉस्फोरस व लौह तत्व सहित विटामिन तो होता ही है, इसके अलवा बैर के फलों में अम्लता भी पाई जाती है।