अलवर

समय और ज्यादा किराए के आगे हार गई रोडवेज, ट्रेनों के मुकाबले लग रहा दुगुना समय

राजस्थान रोडवेज की बसें ट्रेनों के आगे हार मान चुकी हैं। ट्रेनों के मुकाबले गंतव्य तक पहुंचने में लगभग डेढ़ से दोगुना तक ज्यादा समय लग रहा है।

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Apr 14, 2026

अलवर.
राजस्थान रोडवेज की बसें ट्रेनों के आगे हार मान चुकी हैं। ट्रेनों के मुकाबले गंतव्य तक पहुंचने में लगभग डेढ़ से दोगुना तक ज्यादा समय लग रहा है। इस समय के कम करने के लिए कई बार मंथन भी हो चुका है, लेकिन टूटी सड़कें और कदम-कदम पर बने स्टॉपेज की वजह से ट्रेनों के मुकाबले बसें काफी पीछे रह गई हैं।
जयपुर रूट की बात करें तो ट्रेनों से यह सफर महज सवा से ढाई घंटे में पूरा हो जाता है, जबकि बस से जयपुर पहुंचने में करीब साढ़े चार घंटे लग रहे हैं। इसी तरह दिल्ली रूट पर भी ट्रेनें ढाई से तीन घंटे ले रही है, जबकि बस से यह सफर पूरा करने में चार घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है। यही वजह है कि लंबी दूरी की यात्रा में लोग आज भी ट्रेनों का ही प्रयोग कर रहे हैं। हालांकि स्लिपर कोच बसों से कुछ लोग आज भी लंबी दूरी की यात्रा कर रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है।
किराया भी बहुत ज्यादा
ट्रेनों के सामान्य कोच में जयपुर और दिल्ली का किराया 70 से 100 रुपए के बीच है, जबकि बसों में यह किराया 150 से 200 रुपए के बीच है। यानी किराया दुगुना देने के बाद भी समय ज्यादा लग रहा है। ट्रेनों में सभी तरह की सुविधा है, जबकि बस चालक और परिचालक के निर्देश पर चलती है। वे रोडवेज के तय रूट पर ही बसों को रोकते हैं।
एसी ट्रेन पसंद, मगर बस से दूरी
ट्रेन के एसी कोच में सफर आज भी सबसे अच्छा और सुरक्षित माना जाता है, जबकि एसी बसों से लोग दूरी बनाते हैं। अलवर से जोधपुर रूट पर एसी बस का संचालन एक दिन में ही बंद कर दिया गया, क्योंकि सवारी नहीं मिली। अब इसे जयपुर तक चलाया जा रहा है, लेकिन इस रूट पर भी सवारियों का टोटा है। जबकि एसी बसों और ट्रेनों के एसी कोच के किराए में ज्यादा अंतर नहीं है।
लोकल रूट ने बचा रखी है लाज
दोनों डिपो को सर्वाधिक कमाई अलवर जिले के लोकल रूट से ही हो रही है। इसके अलावा दिल्ली, जयपुर, बहरोड़ रूट पर भी यात्रियों की संख्या सर्वाधिक है। हालांकि ट्रेनों से तुलना की जाए तो यह काफी कम है। सर्दियों में दोपहर में यात्रीभर सही रहता है तो गर्मियों में सुबह, शाम और रात के वक्त बसों में यात्रियों की संख्या ज्यादा रहती है।
190 से ज्यादा बसें और 75 हजार किमी का सफर
मत्स्य नगर और अलवर डिपो से रोजाना 190 से ज्यादा बसों का संचालन किया जा रहा है। ये बसें रोजाना 75 हजार किमी से ज्यादा का सफर कर रही है। इससे रोजाना दोनों डिपो को करीब 32 से 35 लाख रुपए रोजाना का राजस्व प्राप्त हो रहा है। मत्स्य नगर डिपो की बसें मुख्य रूप से दिल्ली, जयपुर, बहरोड़, चडीगढ़ और हरिद्वार रूट पर संचालित हो रही हैं, जबकि अलवर डिपो की बसें भरतपुर, मथुरा, आगरा, राजगढ़ और दिल्ली पर संचालित हो रही हैं।

Published on:
14 Apr 2026 04:46 pm
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