राजस्थान रोडवेज इस साल प्रदेशभर के 52 आगारों को 754 अनुबंधित बसें उपलब्ध कराएगा। इनमें स्लिपर, एसी व नॉन एसी बसें शामिल हैं।
अलवर. राजस्थान रोडवेज इस साल प्रदेशभर के 52 आगारों को 754 अनुबंधित बसें उपलब्ध कराएगा। इनमें स्लिपर, एसी व नॉन एसी बसें शामिल हैं। अलवर के हिस्से में 24 बसें आएंगी। इनमें से मत्स्य नगर को जल्द ही चार व अलवर को 2 एसी बसें मिलने वाली हैं। इन बसों के रूट तय किए जा रहे हैं। हालांकि पूर्व में मिली एसी बसों का अनुभव अच्छा नहीं रहा है।
मत्स्य नगर डिपो ने चार में से दो बसों को जोधपुर चलाने की प्लानिंग की है। शेष बची दो में एक बस को सांवरिया सेठ के लिए चलाया जा सकता है। इसका संचालन वाया चित्तौड़गढ़ किया जाएगा। हालांकि सभी रूट्स को लेकर अभी प्लानिंग की जा रही है। इसी तरह अलवर डिपो भी प्लानिंग कर रहा है कि किन मार्गों पर इन बसों को चलाया जाए। रूट का चयन इस प्रकार किया जाएगा कि रोडवेज को राजस्व मिल सके। गौरतलब है कि बसों की कमी के कारण रोडवेज को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। आरोप भी लग रहे थे कि निजी बस संचालकों को फायदा पहुंचाने के लिए बसों की खरीद नहीं की जा रही है। अब इन डीलक्स बसों के आने के बाद यात्रीभार बढ़ेगा और निगम की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
यूं होगा अलवर को बसों का आवंटन
अलवर डिपो को तीन बाई 2 की 6 नॉन एसी, दो बाई 1 की दो नॉन एसी स्लीपर और दो बाई दो की दो एसी बसें यानी कुल 10 बसें मिलेंगी। इसी तरह तीन बाई 2 की 4 नॉन एसी, दो बाई दो की 4 नॉन एसी, दो बाई 1 की दो नॉन एसी स्लीपर, दो बाई 1 की दो एसी स्लीपर और दो बाई दो की दो एसी बसें यानी 14 बसें मिलेंगी।
राजस्व प्राप्त करना सबसे बड़ी चुनाैती
अलवर में एसी बसों का संचालन आसान नहीं है। पूर्व में भी जयपुर और दिल्ली रूट पर इन बसों को चलाया गया था, लेकिन राजस्व नहीं मिलने की वजह से बसों को बंद करना पड़ा। एसी बसों का किराया हर यात्री की जेब के लिए वहन करना आसान नहीं है। साथ ही, अलवर से जयपुर और दिल्ली के बड़ी संख्या में ट्रेनें चलती हैं, ऐसे में यात्रीभार जुटाना सबसे बड़ी टास्क होगी।