अलवर

अब हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण भी बनेगी कमाई का जरिया

पहाड़, मिट्टी, उद्योग व व्यापार अब तक सरकार की तिजोरी भरते रहे हैं, लेकिन अब वन क्षेत्र की हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण, वन्यजीव आदि भी सरकार को मोटी रकम दिलवाने का जरिया बनेंगे। सरिस्का बाघ परियोजना देश का पांचवां टाइगर रिजर्व है, जहां अब हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण, वन्यजीव एवं अन्य चीजों का मूल्य आंक बजट जारी किया जाएगा।

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Nov 29, 2021
अब हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण भी बनेगी कमाई का जरिया

अलवर. पहाड़, मिट्टी, उद्योग व व्यापार अब तक सरकार की तिजोरी भरते रहे हैं, लेकिन अब वन क्षेत्र की हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण, वन्यजीव आदि भी सरकार को मोटी रकम दिलवाने का जरिया बनेंगे। सरिस्का बाघ परियोजना देश का पांचवां टाइगर रिजर्व है, जहां अब हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण, वन्यजीव एवं अन्य चीजों का मूल्य आंक बजट जारी किया जाएगा। दिल्ली की संस्था दा एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से सरिस्का में रिसर्च शुरू किया गया है, यह दो साल चलेगा।

सरिस्का बाघ परियोजना प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के कारण यहां समाज, देश एवं दुनियां को देने के लिए बहुत कुछ है। इन्हीं संभावनाओं के चलते दिल्ली की संस्था टेरी ने अलवर जिले की सरिस्का बाघ परियोजना को रिसर्च के लिए चुना है। इस रिसर्च का उद्देश्य एनालिसिस फॉर एनर्जी इको सिस्टम सर्विसेज है।

दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण

वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण प्रदूषण है। देश विदेश में बढ़ते वाहन एवं उनमें डीजल व पेट्रोल के उपयोग से कार्बन की समस्या गहराने लगी है। वहीं प्रकृति कार्बन को अवशोषित करने का सबसे बड़ा साधन है। इनमें वन क्षेत्र कार्बन अवशोषित करने का बड़ा उपाय है। पुराने वृक्ष ज्यादा मात्रा में कार्बन अवशोषित करते हैं।

सरिस्का एनसीआर का एक मात्र टाइगर रिजर्व

राष्ट्रीय राजधानी परियोजना (एनसीआर) में सरिस्का बाघ परियोजना एक मात्र टाइगर रिजर्व एवं बड़ा वन क्षेत्र है। यहां बड़ी मात्रा में पुराने वृक्ष होने से सरिस्का पर्यावरण सुधार में बड़ी भूमिका निभाता रहा है। यही कारण है कि दिल्ली की संस्था टेरी ने रिसर्च के लिए सरिस्का बाघ परियोजना का चयन किया है।

सरिस्का अलवर ही नहीं दुनियां के लिए भी जरूरी

सरिस्का बाघ परियोजना केवल अलवर जिले की जरूरत नहीं, बल्कि देश के अन्य क्षेत्र, विदेश, समाज व देश की जरूरत बन गई है। यहां की हरियाली, पुराने वृक्ष एवं प्राकृतिक संसाधन देश- विदेश की पर्यावरण प्रदूषण की समस्या में सुधार के लिए बड़ी भूमिका निभाता रहा है।

सरिस्का की हवा, पानी के मूल्य की गणना होगी

टेरी संस्था सरिस्का बाघ परियोजना में उपलब्ध हवा, पानी, हरियाली, पर्यावरण, वन्यजीव जीवन आदि का मूल्य आंकेगी। प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले मूल्य के आधार पर सरिस्का टाइगर रिजर्व को संस्था की ओर से फंड दिया जाएगा। इस राशि का उपयोग सरिस्का प्रशासन आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में करेगा। इस राशि से ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

दो साल चलेगा रिसर्च

दिल्ली की टेरी संस्था की ओर से वर्ष 2023 तक रिसर्च कर सरिस्का बाघ परियोजना के प्राकृतिक संसाधनों की वैल्यू आंकी जाएगी। इस आधार पर मिलने वाले फंड का उपयोग ग्रामीणों के जनजीवन को ऊपर उठाने में किया जाएगा। सरिस्का देश का पांचवां टाइगर रिजर्व है, जहां यह रिसर्च हो रही है।

आरएन मीणा

क्षेत्र निदेशक सरिस्का बाघ परियोजना

Published on:
29 Nov 2021 12:48 am
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