
जिले में 1213 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सरिस्का बाघ परियोजना भी अवैध खनन का दंश झेल चुकी है। इसका खुलासा फोरेस्ट सर्वे ऑफ इण्डिया (एफएसआई) में हो चुका है। पिछले दिनों न्यायालय ने अलवर जिले में 274 अवैध खनन स्थलों की मौका रिपोर्ट तैयार कर पेश करने के निर्देश दिए हैं। इन 274 अवैध खनन स्थलों में 25 से 30 अवैध खनन के स्थान सरिस्का बाघ परियोजना में मिले हैं। पिछले दिनों इन अवैध खनन स्थलों की सरिस्का प्रशासन ने मौका रिपोर्ट तैयार की है, जिनमें ज्यादातर स्थानों पर पूर्व में अवैध खनन होना पाया गया है।
वर्ष 2005 में सरिस्का हो गया था बाघ विहिन
सरिस्का में वर्ष 2000 से लेकर 2005 तक बाघों के शिकार की घटनाएं हुई, नतीजतन वर्ष 2005 में सरकार ने सरिस्का को बाघ विहिन घोषित कर दिया। सरिस्का में बाघों की दहाड़ थमने का नुकसान यह हुआ कि यहां अवैध खनन ने पांव पसार लिए। सरिस्का को ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है, एेसे में बाघ नहीं रहने पर खान माफिया ने जिले के दूसरे क्षेत्रों के साथ यहां भी अवैध खनन शुरू कर दिया। यही कारण है कि एफएसआई सर्वे में अब सरिस्का में 25 से 30 स्थानों पर अवैध खनन के अवशेष मिले हैं। पिछले दिनों ही सरिस्का प्रशासन ने मूण्डली में अवैध खनन पकड़ा, जिसका बाद में मामला दर्ज कराया गया।
अब फिर संकट मंडराने लगा
सरिस्का में फिर अवैध खनन का संकट मंडराने लगा है, इसका कारण है कि यहां फिर से बाघों की कमी होने लगी है। वर्ष 2018 में ही तीन टाइगर सरिस्का में कम हो गए। इनमें बाघ एसटी-11 का शिकार खेत में लगे फंदे में फंसने से हुआ। वहीं बाघिन एसटी-5 का शिकार ग्रामीणों ने किया। इसके अलावा बाघ एसटी-4 की मौत भूख के चलते हुई। वर्तमान में बाघिन एसटी-10 के तीन शावकों पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। यदि जल्द ही सरिस्का में बाघों का कुनबा नहीं बढ़ाया गया तो खान माफिया के सक्रिय होने का अंदेशा है।
एफएसआई सर्वे में कई स्थान
एफएसआई सर्वे में सरिस्का क्षेत्र में भी 25 से ज्यादा स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों की मौका रिपोर्ट तैयार कराई गई है।
हेमंत सिंह
डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना अलवर