अलवर

दिग्गजों ने उठाए थे सवाल, अब फिर सामने आया बवाल

सरिस्का बाघ परियोजना में बाघों की राह में मानवीय दखल बड़ी समस्या रही है। वीपी सिंह की अध्यक्षता में एम्पावर्ड कमेटी, अजीत सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी, डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट एवं सरिस्का में रह चुके पूर्व अधिकारी भी समय-समय पर बाघों की राह में गांवों के धीमे विस्थापन को रोड़ा बता चुके हैं।
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Nov 30, 2019
दिग्गजों ने उठाए थे सवाल, अब फिर सामने आया बवाल
दिग्गजों ने उठाए थे सवाल, अब फिर सामने आया बवाल

अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना में बाघों की राह में मानवीय दखल बड़ी समस्या रही है। वीपी सिंह की अध्यक्षता में एम्पावर्ड कमेटी, अजीत सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी, डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट एवं सरिस्का में रह चुके पूर्व अधिकारी भी समय-समय पर बाघों की राह में गांवों के धीमे विस्थापन को रोड़ा बता चुके हैं।
सरिस्का बाघ परियोजना के 1200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में करीब 26 गांव बसे हैं। स्टेट एम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि सरिस्का के मुख्य टाइगर हैबीटाट में लंबे समय से व्यवधान है। यहां लोगों एवं वाहनों की आवाजाही बाघों के लिए बड़ी समस्या है। सरिस्का में बसे 26 गांवों में 15 हजार से ज्यादा लोग निवास करते हैं। वहीं पाण्डुपोल मंदिर पर हर साल मेले व अन्य दिनों 6 लाख से ज्यादा लोग पहुंचते हैं। सरिस्का में दो स्टेट हाइवे 29 ए व 13 से प्रतिदिन 3000 से ज्यादा वाहन निकलते हैं। बढ़ते मानवीय दखल के कारण बाघों को सघन जंगल छोड़ बाहरी इलाकों में जाना पड़ता है। कमेटी की रिपोर्ट में बताया कि जब तक सरिस्का में मानवीय दखल कम नहीं होगी, तब तक बाघों के शिकार व पलायन की समस्या रहेगी।

स्टैंडिग कमेटी ने जताई चिंता

स्टैंडिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट में भी सरिस्का में गांवों के विस्थापन की धीमी गति को बाघों के लिए खतरा बताया गया। पिछले साल सरिस्का में बाघ एसटी-11 की मौत की जांच के लिए अजीत सिंह के नेतृत्व में स्टैंडिंग कमेटी सरिस्का आई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि गांवों के विस्थापन नहीं होने तक सरिस्का में बाघ सुरक्षित नहीं है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट में भी गांवों के विस्थापन नहीं होने को बाघों की राह में रोडा बताया था। सरिस्का में पूर्व में रह चुके अधिकारी भी सरिस्का में मानवीय दखल को बाघों के लिए समस्या बता चुके हैं।

यह है सरिस्का में विस्थापन का गणित

सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र में बसे 26 गांवों में से अब तक केवल तीन गांव उमरी, भगानी व रोटक्याला का पूरी तरह विस्थापन हो पाया है। अभी डाबली, सुकोला, कांकवाड़ी, क्रास्का, हरिपुरा व देवरी का विस्थापन लक्ष्य अधूरा ही है। वर्ष 2008 से 11 के बीच हुए सर्वे में इन 9 गांवों के 973 परिवारों को विस्थापन के लिए चयनित किया गया था। इनमें से अब तक केवल 660 परिवार ही विस्थापित हो पाए हैं। शेष 313 परिवार अब तक सरिस्का में जमे हैं।

Published on:
30 Nov 2019 06:00 am