सरिस्का में बाघिन एसटी-5 के लापता होने के बाद 500 कैमरे लगाए गए, लेकिन बाघिन का कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
अलवर. सरिस्का प्रशासन को तीन महीनों से ज्यादा की तलाश के बाद भी बाघिन एसटी-5 का पता नहीं चल पाया। इतना ही नहीं बाघिन की तलाश में एनटीसीए के प्रोटोकॉल के तहत लगाए गए 500 से ज्यादा कैमरों में 45 दिनों में फोटो तो करीब 10 लाख ट्रैप हो गए, लेकिन इनमें भी अब तक बाघिन एसटी-5 कहीं नहीं दिख पाई है।
सरिस्का प्रशासन के लिए बाघिन एसटी-5 अब तक अबूझ पहेली बनी हुई है। करीब तीन महीनों तक जंगल का कोना-कोना तलाश करने के बाद भी वनकर्मियों को न बाघिन मिली और न ही उसकी फोटो। अब सरिस्का प्रशासन की अंतिम उम्मीद कैमरों में कैद हुए वन्यजीवों की फोटो पर टिकी है।
कैमरों में कैद हुए 9 से 10 लाख फोटो
एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत सरिस्का में पिछले दिनों 500 से ज्यादा कैमरे लगाए गए। प्रोटोकॉल के तहत 45 दिनों तक कैमरे सरिस्का के सभी वाटर हॉल्स, टाइगर की पगडंडियों, रास्तों एवं अन्य स्थानों पर लगे रहे। इस दौरान कैमरे के सामने आने वाला हर वन्यजीव इन कैमरों में कैद हो गया। इतना ही नहीं पिछले दिनों जिले में आए तूफान के दौरान पेड़, पत्तियों के हिलने की फोटो भी कैमरे में कैद हो गई। इस कारण कैमरों में फोटो की संख्या 9 से 10 लाख तक पहुंच गई।
फोटो की पहचान करना हो रहा मुश्किल
सरिस्का प्रशासन ने कैमरों से डाटा को डाउनलोड करने का काम पूरा कर लिया। एक अनुमान के मुताबिक 500 कैमरों से 800 जीबी से ज्यादा डाटा डाउनलोड किया गया है। अब इन फोटो की पहचान करना वनकर्मियों के लिए मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि सरिस्का प्रशासन का मानना है कि सभी फोटो की पहचान करने में 20 से 30 दिन लग सकते हैं। वैसे भी 10 लाख फोटो में से एक बाघिन को ढूंढ निकालना अब तक जंगल में बाघिन एसटी-5 की तलाश करने से भी बड़ा कार्य दिखाई पड़ता है।
अंतिम उम्मीद है कैमरा ट्रैप
सरिस्का प्रशासन के लिए बाघिन एसटी-5 की आखिरी उम्मीद इन्हीं फोटो में छिपी है। जंगल में तलाश के सारे तौर तरीके अपनाने के बाद भी बाघिन एसटी-5 वनकर्मियों को नहीं मिल सकी है। सरिस्का प्रशासन का मानना है कि यदि बाघिन जंगल में है तो उसकी फोटो इन कैमरों में जरूर दिखाई देगी। कैमरों की फोटो में भी बाघिन एसटी-5 नहीं दिख पाई तो एनटीसीए व भारतीय वन्यजीव संस्थान बाघिन एसटी-5 को लेकर कोई घोषणा करेगा।
एसटी-5 की फैक्ट फाइल
बाघिन- एसटी-5
उम्र- 12 साल से ज्यादा
अंतिम लोकेशन ट्रेस- 7 फरवरी 2018
अंतिम पगमार्क मिले- 24 फरवरी 2018
तलाश में जुटे- 100 से ज्यादा वनकर्मी
एनटीसीए प्रोटोकॉल- 45 दिन तक 500 कैमरों से तलाश
फर्जी सिग्नल मिले- करीब 15 दिन