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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सफाई कर्मियों की हड़ताल, वेतन और 12 घंटे की ड्यूटी को लेकर फूटा गुस्सा

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के पिनान रेस्ट एरिया में मंगलवार को सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। वेतन वृद्धि और 12 घंटे के लंबे ड्यूटी समय के विरोध में सफाई कर्मियों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हड़ताल के कारण एक्सप्रेस-वे के होटल, ढाबों और पेट्रोल पंपों पर गंदगी का अंबार लग गया।

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सफाई कर्मियों की हड़ताल (फोटो - पत्रिका)*

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का पिनान रेस्ट एरिया मंगलवार को अव्यवस्थाओं का केंद्र बना रहा। यहां काम करने वाले सैकड़ों सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक रूप से काम का बहिष्कार कर दिया और हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों का आरोप है कि 'पार्थ कंपनी' के अधीन उनसे रोजाना 12 घंटे की कड़ी मशक्कत कराई जा रही है, लेकिन इसके बदले मिलने वाला वेतन बेहद कम है।

सफाईकर्मियों ने रोहिताश, अरुण, मुकेश, दिनेश और कालूराम जैसे साथियों के नेतृत्व में कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि एक्सप्रेस-वे जैसे महत्वपूर्ण रूट पर चौबीसों घंटे सफाई व्यवस्था बनाए रखने के बावजूद उनके हक की अनदेखी की जा रही है। हड़ताल के चलते रेस्ट एरिया में संचालित होटलों, मोटल और ढाबों के बाहर कचरा जमा होने लगा, जिससे वहां रुकने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

वेतन में भेदभाव का लगाया आरोप

सफाई कर्मचारियों का मुख्य गुस्सा वेतन में हो रही विसंगतियों को लेकर है। कर्मियों ने बताया कि पहले जब बीवीजी कंपनी यहाँ का रख-रखाव देखती थी, तब उन्हें अच्छा वेतन मिलता था। लेकिन पिछले 10 महीनों से जब से पार्थ कंपनी ने काम संभाला है, उनके वेतन पर 'कैंची' चला दी गई है।


कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी दोहरा मापदंड अपना रही है। पेट्रोल पंप पर काम करने वाले टेक्निकल हेल्परों, जो केवल 8 घंटे की ड्यूटी करते हैं, उनके वेतन में बढ़ोतरी कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर, 12 घंटे तक पसीना बहाने वाले सफाई कर्मियों के वेतन में कोई इजाफा नहीं किया गया है। उनकी मांग है कि ड्यूटी का समय घटाकर 8 घंटे किया जाए और सम्मानजनक वेतन वृद्धि की जाए।

कंपनी का पक्ष: नियमों के हिसाब से मिल रहा पैसा

इस पूरे विवाद पर पार्थ कंपनी के फैसिलिटी मैनेजर मूलचंद सिंह का अलग तर्क है। उनका कहना है कि वेतन का निर्धारण स्थानीय सर्किल रेट और कर्मचारी के अनुभव के आधार पर किया जा रहा है। मैनेजर के मुताबिक, हर कर्मचारी की मांग पूरी करना संभव नहीं है क्योंकि कंपनी के अपने नियम होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं और जो हाल ही में भर्ती हुए हैं, उनके वेतन में अंतर रहेगा ही।

फिलहाल, कर्मचारियों की हड़ताल जारी है और एक्सप्रेस-वे के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और कंपनी इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।