अलवर

सर्दी के मौसम में बीमारियो की चपेट में आ रहे हैं लोग, डॉक्टर की सलाह मानें और इस तरह रखें अपना ख्याल

सर्दी में लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, अस्पतालों में इन दिनों खांसी-जुकाम, बुखार आदि के मरीज की संख्या बढ़ रही है।
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Jan 11, 2019
Season Disease Patients Increase In Alwar
सर्दी के मौसम में बीमारियो की चपेट में आ रहे हैं लोग, डॉक्टर की सलाह मानें और इस तरह रखें अपना ख्याल

अलवर. सर्दी के मौसम में नौनिहाल मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिसके कारण अस्पतालों में बीमार बच्चों की कतार लगी हुई है। वहीं अस्पताल में भर्ती बच्चों की संख्या भी बढ़ गई है।

जिला मुख्यालय के गीतानंद शिशु चिकित्सालय में इन दिनों बच्चे सर्दी, खांसी-जुकाम, बुखार, गले में दर्द और विंटर डायरिया से ग्रस्त हो रहे हैं। जिसके कारण अस्पताल का आउटडोर भी बढ़ गया है। सामान्य दिनों में अस्पताल का आउटडोर प्रतिदिन 200 से 250 मरीजों का रहता है, लेकिन सर्दी के मौसम में बढकऱ 350-400 मरीजों तक पहुंच गया है। बीमार बच्चों की संख्या बढऩे से अस्पताल के वार्ड में बेड भी फुल हैं। अस्पताल में 40 बेड हैं, लेकिन भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या 50 से 55 तक पहुंच रही है। ऐसे में कई बेडों पर तक 2-2 मरीज बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। गीतानंद शिशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में बच्चे सर्दी, खांसी-जुकाम, बुखार, गले में दर्द, कप जमना, पसली चलना और विंटर डायरिया आदि मौसमी बीमारियों चपेट में आ रहे हैं। इससे अस्पताल का आउटडोर बढ़ गया है।

यूं रखें सावधानी

चिकित्सकों के मुताबिक मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों को पूरी तरह से गर्म कपड़े पहनाकर रखें और सर्दी में नंगे पैर नहीं घूमने दें। खाने से पहले अच्छी तरह से साबुन से हाथ धुलवाएं। घर में यदि कोई मौसमी बीमारी से ग्रस्त है तो उससे बच्चों को दूर रखें। खांसते समय मुंह पर रुमाल रखें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें। बच्चों को ताजा बना गर्म खाना खिलाएं। साथ ही जरा भी तबीयत बिगडऩे पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श व उपचार लें।

मौसम परिवर्तन से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्येन्द्र मित्तल के अनुसार मौसम में परिवर्तन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे बीमारियां होना भी आम है। जिसका असर विशेषकर बच्चों पर पड़ता है। बच्चों में विशेषत: खांसी-जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त, टॉन्सीलाइटिस, दमा, रूखी त्वचा की परेशानी होती है। साथ ही स्वाइन फ्लू का खतरा भी बढ़ जाता है।

Published on:
11 Jan 2019 12:09 pm