
अलवर. जिले का सबसे बड़ा महिला चिकित्सालय इन दिनों जननियों के बोझ से दबा जा रहा है। प्रतिमाह यहां पर जननियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन स्टाफ की कमी व अन्य सुविधाएं ना होने के कारण इन महिलाओं को प्रसव होने के कुछ दिन बाद ही घर भेजा जा रहा है। ऐसे में कई बार घर जाने पर परेशानी होती है तो उन्हें फिर से वापस अस्पताल में ही आना पड़ता है।
गौरतलब है कि महिला चिकित्सालय में अलवर जिले से ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली, दौसा, बांदीकुई, भिवाडी, नगर, भरतपुर आदि जगहों से भी महिलाएं प्रसव के लिए आ रही है। बाहर से अधिक जननी महिलाओं के आने के कारण जिले की गर्भवती व प्रसुताओं को इलाज मिलने में भी परेशानी हो रही है।
यहां पर वार्डो में 60 से अधिक प्रसूताएं भर्ती रहती है। जो कि सीजेरियन या नॉर्मल डिलीवरी की होती है। इसके बाद भी यहां पर एसएलआर वार्ड में डे और नाइट में मात्र 1 नर्सिंग स्टाफ नियुक्त रहता है। जो इतने रोगियों को एक साथ नहीं संभाल सकता है। अस्पताल में करीब 250 बैड है। जो पूरी तरह से भरे हुए हैं। वर्तमान में यहां होने वाली प्रसव व जांच को देखते हुए यहां पर 5 स्त्री रोग विशेषज्ञ, 20 नर्सिंगकर्मी स्टाफ की जरूरत है।
अस्पताल में प्रसुताएं अधिक है, ऐसे में बैड की कमी के चलते उनको भर्ती करने की जगह नहीं मिल पाती है। इसके लिए सीजेरियन प्रसव कराने वाली महिलाओं 5 दिन में ही छुटटी दी जा रही है। यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो जिम्मेदार कौन होगा।
यहां पर मिलती हैं सुविधाएं: गर्भवती महिला को 3 महिने के बाद पहला टीका निशुल्क लगाया जाता है। जबकि दूसरा टीका भी इसके एक माह बाद निशुल्क लगाया जाता है। इसके साथ ही यहां पर एचआईवी, वीडीआरएन टेस्ट, सिफलिस व थायराइड की जांच, रक्त व ब्लड की जांच, गुर्दे व लीवर की जांच व हेपेटाइटिस बी वायरस की जांच निशुल्क की जाती है। इसके चलते दूसरे राज्यों से महिलाएं यहां प्रसव के लिए आती है।
दोगुना हो रहे हैं सीजेरियन प्रसव: अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले सालों में सीजेरियन ऑपरेशन की संख्या 100 से 130 तक ही रहती थी जो पिछले कुछ माह मेें दोगुनी हो गई है। इनमें ऐसे प्रसुताएं भी शामिल है जो प्रसव वेदना सहन नही करना चाहती और स्वयं ही ऑपरेशन करवा रही है।
ये है जरुरत
&सिजेरियन ऑपरेशन अधिक नहीं है। सभी प्रसुताओं को जांच आदि की पूरी सुविधा दी जा रही है। जिनके पहला सीजेरियन बच्चा हुआ है उनको पांच दिन में छुटटी दी जा रही है। यहां स्टाफ की कमी है। इसकी सूचना चिकित्सा मंत्री , मुख्यालय सभी को दी जा चुकी है।
डॉ. श्याम बिहारी झारेड़ा, प्रभारी, जनाना अस्पताल।