
अलवर. थानागाजी में गैंगरेप की घटना ने एक बार अलवर को फिर से शर्मसार कर दिया है। महिलाओं व बालिकाओं के साथ लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगता है कि समाज की मानसिकता बेटियों को लेकर अभी वहीं की वहीं है। गैंगरेप की घटना से भी ज्यादा पीड़ा इस बात को लेकर है कि इस तरह की घटनाओं में पुलिस भी महिलाओं का साथ नहीं दे रही है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बहुत से मामले थाने में ही दबा दिए जाते हैं। राजस्थान पत्रिका ने शहर के बुद्धिजीवियों से बातचीत की तो सबका यही कहना था कि आरोपियों को बख्शा ना जाए, सख्त से सख्त कार्रवाई हो। दोषी पुलिसकर्मियों को भी सबक मिलना चाहिए।
बालिकाओं के साथ लगातार घटनाएं सामने आ रही है। पूर्व में एसपी राहुल प्रकाश के समय एक मामला आया तो फोन पर सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की गई। लेकिन गैंगरेप जैसी घटना को दबाए रखना बहुत गलत है। पुलिस को ऐसे मामलों में तत्परता से कार्रवाई करने की जरुरत है।
दया गर्ग, सदस्य, बाल कल्याण समिति, अलवर
थानागाजी में महिला के साथ गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। आरोपियों ने वीडियो वायरल करने की जो घिनौनी करतूत की है उसकी सजा मिलनी ही चाहिए। जिससे ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों को हौंसले पस्त हो जाए। मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों को भी सजा मिलनी चाहिए। उनकी वजह से न्याय मिलने में देरी होती है।
अर्चना कुमारी, फैशन डिजायनर
इस तरह के मामलों में पहले भी कई बार सख्त सजा हुई है। लेकिन अब लगता है कि लोगों में कानून व पुलिस का डर पूरी तरह से खत्म हो गया है। इस तरह के मामलों में आरोपियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। जिससे अगली बार कोई ऐसी गलती ना करें। पुलिस का डर अपराधियों में बना रहे इसलिए जरुरी है कि मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस कार्रवाई करे।
नरेंद्र सीमतवाल, प्रदेश महासचिव,सामाजिक जन कल्याण संस्थान, अलवर
देश 21वीं सदी के दो दशक जी चुका है। कहने को तो हम आधुनिक हो गए हैं लेकिन हालात वहीं के वहीं है। आधुनिक समाज में यदि हम महिला की अस्मिता की रक्षा कर पाने में असमर्थ है तो आधुनिक कहलाने का हक नहीं है। थानागाजी की घटना निश्चित ही असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। प्रशासन व पुलिस को ऐसे मामलों में चिंतन की जरुरत है।
रोहित कुमार जैन, समाजशास्त्री, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
इस तरह की घटनाएं समाज के गिरते स्तर को बताती है। कहने के लिए महिलाएं आजाद है, आगे बढ़ रही है। लेकिन पढ़े लिखे समाज में महिलाओं के प्रति पुरुषों की सोच आज भी वही की वही है। आज 4 माह की बच्ची से लेकर विवाहिता तक के साथ दुष्कर्म की घटनाओं की वजह से ही बेटियों को बोझ समझा जाने लगा है।
सोनिया
महिलाओं के साथ हो रही घटनाएं समाज की संकीर्ण मानसिकता को बता रही है। लेकिन अच्छी बात यह है कि महिलाएं अब अपने साथ हो रही घटनाओं को दबाती नहीं है बल्कि पुलिस को बताती है। यह एक अच्छा बदलाव है। जरुरत है कि पुलिस ऐसी महिलाओं का साथ दे जिससे कि उनको न्याय मिल सके।
शंकर सैनी, व्यवसाई