अलवर

जान के खतरे में पढ़ाई, अलवर के सरकारी स्कूल में छत से गिरी पट्टी, गुस्से में आए छात्रों का तालाबंदी कर धरना-प्रदर्शन 

थानागाजी के जोधावास सरकारी स्कूल में जान का जोखिम उठाकर बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। जर्जर हो चुके भवनों में हाल ही में छत की पट्टी गिर गई। शिक्षकों की कमी और टपकती छतों से तंग आकर अब विद्यार्थियों ने मोर्चा खोल दिया है।
2 min read
Aug 13, 2026
thanagazi jodhawas school
धरने पर बैठे स्टूडेंट्स (फोटो - पत्रिका)

अलवर जिले के थानागाजी उपखंड स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधावास में शिक्षा व्यवस्था की बेहद बदहाल तस्वीर सामने आई है। यहां बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल के दो भवनों को काफी समय पहले ही प्रशासन की ओर से जर्जर घोषित किया जा चुका है, लेकिन इन्हें आज तक ध्वस्त नहीं कराया गया।

हाल ही में इन जर्जर कमरों में से छत की एक पट्टी अचानक नीचे गिर गई। गनीमत यह रही कि उस वक्त वहां बच्चे खेल नहीं रहे थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस खतरे के बीच पूरा स्कूल फिलहाल केवल तीन कमरों में चलाया जा रहा है। बारिश के मौसम में ये कमरे भी टपकते हैं, जिससे बच्चों का बैठना तक मुश्किल हो जाता है। कमरों की कमी के कारण शिक्षण कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

4 साल से नहीं मिला एक भी लेक्चरर

भवन के साथ-साथ यहां पढ़ाई का ढांचा भी पूरी तरह चरमराया हुआ है। स्कूल को अपग्रेड हुए 4 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यहां लेक्चरर (व्याख्याता) के पद ही स्वीकृत नहीं किए गए हैं। इसके अलावा वरिष्ठ अध्यापकों (सेकंड ग्रेड टीचर) के 6 में से 5 पद खाली पड़े हैं। स्कूल में केवल सामाजिक विज्ञान के शिक्षक हैं, जबकि गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी जैसे मुख्य विषयों के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। ऐसे में बच्चों का भविष्य अंधकार में लटक गया है।


छात्रों का फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने भी दिया साथ

प्रशासनिक अनदेखी से परेशान होकर तन्नू, पूजा शर्मा, मोहन और खुशी शर्मा सहित तमाम विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर धरना शुरू कर दिया है। छात्रों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों को गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

विद्यार्थियों के इस आंदोलन को स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। सभी ग्रामीण भी बच्चों के साथ धरने पर डट गए हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक जर्जर भवनों को ढहाकर नए कमरे नहीं बनाए जाते और खाली पड़े पदों को नहीं भरा जाता, तब तक उनका धरना खत्म नहीं होगा। अब देखना यह है कि सो रहा शिक्षा विभाग इस खतरे पर कब जागता है।

Updated on:
13 Aug 2026 03:03 pm
Published on:
13 Aug 2026 12:38 pm
Also Read
View All