वकालत के प्रति युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। हाईकोर्ट की बेंच नहीं होने के बाद भी हर साल बड़ी संख्या में लोग बार एसोसिएशन में वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं।
वकालत के प्रति युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। हाईकोर्ट की बेंच नहीं होने के बाद भी हर साल बड़ी संख्या में लोग बार एसोसिएशन में वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। आज अलवर जिले में वकीलों की संख्या 3 हजार के पार पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा।
अलवर में लॉ कॉलेज भी है। यहां से हर साल 200 से ज्यादा विद्यार्थी वकील बनकर निकल रहे हैं। हर साल 500 से ज्यादा विद्यार्थी लॉ कॉलेज में दाखिला के लिए फॉर्म भरते हैं, लेकिन नंबर 240 का ही आता है। ऐसे में कई युवा अलवर से बाहर जाकर भी एलएलबी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में युवा वकीलों की तादाद खूब होगी।
कई वकील ऐसे हैं, जिनका परिवार वकालत के पेशे से जुड़ा है। ऐसे में कई युवाओं ने अपने परिवार के पुश्तैनी पेशे को ही अपना करियर चुना है। कई वकील ऐसे हैं जो दिल्ली, जयपुर में वकालत कर रहे हैं। कई सरकारी कर्मचारी भी सेवानिवृत होने के बाद वकालत कर रहे हैं।
जिले में पेंडिंग केसेज की संया लगातार बढ़ रही है। उस हिसाब से वकीलों की संया कम है। यही वजह है कि युवाओं का रुझान बढ़ा है। कई बड़ी कंपनियों में लीगल ऑफिसर के पद होते हैं, उसमें भी रोजगार मिल रहा है। यह भी रुचि बढ़ने की एक वजह है।
राजनीति में भी वकीलों का अलग ही रुतबा है। देश के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी पेशे से वकील हैं। केंद्रीय वन मंत्री और अलवर सांसद भूपेंद्र यादव भी वकील हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी वकालत पास हैं। पूर्व विधायक रामहेत यादव भी वकालत कर चुके हैं। भाजपा के पूर्व शहर अध्यक्ष केजी खंडेलवाल, पूर्व प्रदेश मंत्री सुरेश यादव और जिला उपाध्यक्ष सुभाष दायमा भी वकील हैं।
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