अनाज मंडी में सरसों की गुणवत्ता जांच करने वाली सरकारी लैब पिछले करीब तीन महीने से बंद पड़ी है। ऐसे में किसानों को सरसों की जांच के लिए मंडी के बाहर संचालित निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
अलवर. अनाज मंडी में सरसों की गुणवत्ता जांच करने वाली सरकारी लैब पिछले करीब तीन महीने से बंद पड़ी है। ऐसे में किसानों को सरसों की जांच के लिए मंडी के बाहर संचालित निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। यही नहीं, निजी लैब में कराई गई जांच रिपोर्ट कितनी सही है, इसका कोई आधार नहीं है। सवाल यह उठ रहा है कि जब मंडी प्रशासन को पता था कि सरसों की आवक फरवरी में शुरू हो जाएगी तो फिर लैब में खराब मशीनों को सही क्यों नहीं करवाया गया? क्या व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए तो यह खेल नहीं किया जा रहा है?
चार्ज ज्यादा नहीं, मगर सरसों की दरों का आधार लैब की रिपोर्ट
निजी लैब से जांच कराने का चार्ज ज्यादा नहीं है। महज 20 रुपए देकर ही यह जांच करवाई जा सकती है, लेकिन सवाल यही है कि व्यापारी लैब संचालक से मिलीभगत करके सरसों की गुणवत्ता खराब बताकर कम दरों में उसे खरीद सकता है। क्योंकि मंडी में सरसों के दाम काफी हद तक उसकी गुणवत्ता और तेल प्रतिशत पर निर्भर करते हैं। व्यापारी भी लैब रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम भाव तय करते हैं। यही नहीं हर लैब की जांच रिपोर्ट में अंतर भी आता है।
रोज किसानों को 20 हजार रुपए का हो रहा नुकसान
अनाज मंडी में रोज एक हजार से ज्यादा किसान सरसों लेकर पहुंच रहे हैं, ऐसे में किसानों को सरसों की जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है। यानी 20 रुपए प्रति जांच के हिसाब से एक हजार किसानों की जांच में करीब 20 हजार रुपए प्रतिदिन का नुकसान हो रहा हैं, जबकि मंडी प्रशासन सरसों की जांच निशुल्क करता है।