राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के नए भवन निर्माण में अभी 61 करोड़ रुपए और खर्च होंगे। बकाया काम होगा। इसका प्रस्ताव बना लिया गया है। मंजूरी के बाद इसे आगे बढ़ाया जाएगा। जानकारों का कहना है कि ये भवन रकम पर रकम खाता जा रहा है लेकिन कार्यदायी संस्था इसका निर्माण पूरा करने की मियाद नहीं बता रही है। यानी काम पूरा होने की गारंटी नहीं दी जा रही है।

राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के नए भवन निर्माण में अभी 61 करोड़ रुपए और खर्च होंगे। बकाया काम होगा। इसका प्रस्ताव बना लिया गया है। मंजूरी के बाद इसे आगे बढ़ाया जाएगा। जानकारों का कहना है कि ये भवन रकम पर रकम खाता जा रहा है लेकिन कार्यदायी संस्था इसका निर्माण पूरा करने की मियाद नहीं बता रही है। यानी काम पूरा होने की गारंटी नहीं दी जा रही है।
भवन निर्माण चरणवार तरीके से किया जा रहा है। इसका खाका खींच लिया गया है। विश्वविद्यालय ने इस खाका को आगे बढ़ाते हुए कार्यकारी एजेंसी आरआरडीसी को भेजा है। वहां से इसे मंजूर किया जाएगा और उसे धरातल पर उतारा जाएगा। पहला ये ऐसा भवन बताया जा रहा है कि जिसका प्रोजेक्ट पहले पास नहीं हुआ। यानी विश्वविद्यालय परिसर में क्या-क्या होगा और कितनी रकम कहां खर्च होगी, इसका प्रस्ताव पहले नहीं बना। विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों से इसके बारे में पता किया गया लेकिन वह बता नहीं रहे। भवन निर्माण पर अब तक 27 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
61 करोड़ से ये होंगे काम: विश्वविद्यालय के नए भवन में 61 करोड़ से एकेडमिक भवन, छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल, गेस्ट हाउस, कुलपति भवन, स्टॉफ के लिए कक्ष, कैंटीन, खेल मैदान आदि कार्य होने हैं। ये काम जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है
सीकर, भरतपुर में भवन तैयार, छात्र पढ़ रहे...यहां सब अधूरा
विश्वविद्यालय की स्वीकृति के दौरान ही प्रदेश सरकार ने सीकर व भरतपुर में विश्वविद्यालय भवन को मंजूरी दी थी। वहां भवन निर्माण पूरा हो गया। छात्रों की पढ़ाई हो रही है लेकिन यहां सब अधूरा है। भवन लगातार रकम पीने का काम कर रहा है। कार्यदायी संस्था को भी कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा और न ही विश्वविद्यालय के अफसरों को। नुकसान छात्रों का हो रहा है। लगातार भवन लागत में रकम बढ़ रही है। इससे छात्र नेताओं में गुस्सा है।
लोकसभा चुनाव से पहले होंगे काम
विभाग की ओर से नए कामों की ड्राइंग अप्रूव कर दी है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले सभी काम शुरू कर दिए जाएंगे। विभाग की कोशिश है कि काम जल्द पूरा हो।
मनोज श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आरएसआरडीसी, यूनिट अलवर।