मत्स्य विश्वविद्यालय के हल्दीना कैम्पस तक पहुंचना विद्यार्थियों के लिए आसान काम नहीं है। यह अलवर शहर से करीब 18 किमी दूर है। सरकार ने इतनी दूरी पर विश्वविद्यालय तो बना दिया, लेकिन इस बात का जरा भी ध्यान नहीं रखा कि आखिर विद्यार्थी यहां तक पहुंचेंगे कैसे?
मत्स्य विश्वविद्यालय के हल्दीना कैम्पस तक पहुंचना विद्यार्थियों के लिए आसान काम नहीं है। यह अलवर शहर से करीब 18 किमी दूर है। सरकार ने इतनी दूरी पर विश्वविद्यालय तो बना दिया, लेकिन इस बात का जरा भी ध्यान नहीं रखा कि आखिर विद्यार्थी यहां तक पहुंचेंगे कैसे? अलवर शहर से यहां कोई रोडवेज बस नहीं जाती। कोई ऑटो वाला जाने को तैयार हो जाए, तो दोनों तरफ का किराया मांग लेता है, वह भी मनमर्जी का। किराया इतना ज्यादा है कि विद्यार्थियों के लिए इसे वहन करना मुश्किल है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यहां बस चलाने के लिए रोडवेज को कई बार पत्र भी लिखा, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
इन 4 रास्तों से पहुंच सकते हैं विश्वविद्यालय
-हनुमान सर्किल से लोहिया का तिबारा और एमआइए होते हुए विश्वविद्यालय पहुंचा जा सकता है, लेकिन यह रास्ता लंबा है।
-दूसरा रास्ता शीतल से मीणापुरा, जहाजपुर होते हुए है, लेकिन हाईवे की वजह से इसका प्रयोग कम होता है।-तीसरा रास्ता अलवर या आसपास के गांवों से बस से मालाखेड़ा जाओ, फिर निजी साधनों से विश्वविद्यालय पहुंच सकते हैं। टोल टैक्स भी देना पड़ेगा।
-चौथा रास्ता भवानी तोप सर्किल, मदनपुरी, भजीट होते हुए है। विद्यार्थी इसी रूट पर रोडवेज चलाने की मांग कर रहे हैं।
रास्ता यह भी आसान नहीं
भवानी तोप सर्किल और भजीट होते हुए जो रास्ता है, वह भी कई जगहों पर खराब है। भजीट में घुमाव वाली जगह सबसे ज्यादा खतरनाक है। यहां रास्ता संकरा है और हमेशा पानी भरा रहता है। इस वजह से कई बार जाम की स्थिति बनती है। बारिश में तो यहां से निकलना मुश्किल है।
फैक्ट फाइल
विवि का निर्माण कार्य शुरू हुआ: 2015
नए भवन में शिफ्टिंग: अक्टूबर, 2024
कैम्पस में विद्यार्थी संख्या: 600
स्टाफ संख्या: 35
विश्वविद्यालय के अंतर्गत निजी व सरकारी कॉलेज:202
निजी कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या: 27000
कैंपस में पीजी कोर्स: इतिहास, भूगोल, गणित, अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान