देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों की स्मृति में आज अलवर जिले में शहीदी दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों की स्मृति में आज अलवर जिले में शहीदी दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन कर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में 'माय भारत' अलवर की ओर से "माय भारत, माय रिस्पांसिबिलिटी" विषय पर एक पदयात्रा का आयोजन किया गया। वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने इस पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मंत्री संजय शर्मा ने पदयात्रा में शामिल स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शहीदों का बलिदान हमें देश के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है।
समारोह के दौरान मंत्री ने 10 उत्कृष्ट 'माय भारत' स्वयंसेवकों को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया। उन्होंने युवाओं से डिजिटल माध्यमों से जुड़ने का आह्वान करते हुए 'माय भारत' पोर्टल पर संचालित क्विज प्रतियोगिता और "एक युवा ऐसा भी" रील प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवा अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
इससे पूर्व, वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने भगत सिंह चौराहा पहुंचकर शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और वे हमें एक सशक्त भारत बनाने की प्रेरणा देते हैं।
शहीद भगत सिंह बलिदान दिवस समारोह समिति की ओर से भी शहर में विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। समिति के संयोजक जोगेन्द्र सिंह कोचर ने जानकारी दी कि सुबह 8 बजे भगत सिंह चौराहा स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर क्रांतिकारियों को सामूहिक श्रद्धांजलि दी गई।
शहीदी दिवस की शाम को महावर ऑडिटोरियम में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नाटक के माध्यम से क्रांतिकारियों के संघर्ष को दिखाया गया। कार्यक्रम में जिले के अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और कलाकार उपस्थित रहे, जिन्होंने शहीदों के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।