
पेंशनरों के हित के लिए चलाई जा रही राजस्थान गवरमेंट हेल्थ योजना (आजीएचएस) की अलवर जिले में मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं होेने से 22 हजार से ज्यादा पेंशनर्स का दवाओं का टोटा झेलना पड रहा है। वहीं सरकारी व निजी मेडिकल स्टोर पर सरकार का लाखों रुपए का बकाया होने के कारण उपभोक्ता भंडारों ने पेंशनर्स को दवा देना बंद कर दिया है।
पेशनर समाज की शाखाएं रामगढ, गोविंदगढ़, खेड़ली, थानागाजी, बहरोड, बानसूर, किशनगढ़बास, तिजारा, रैणी में हैं। अलवर जिले में करीब 20 हजार से ज्यादा पेंशनर्स है। इसमें पारिवारिक पेंशनर व सेवानिवृत्त पेंशनर दोनों ही शामिल है। पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार ने आरजीएचएस योजना का लाभ दिया है। योजना के तहत आउटडोर में पेंशनर को एक साल में करीब 30 हजार रुपए की दवा खरीद का प्रावधान है। जबकि इनडोर में एक पेंशनर को प्रतिदिन करीब एक हजार व साल में साढ़े चार लाख रुपए की दवा खरीदने का छूट है।
लाखों का है बकाया, बना हुआ है आर्थिक संकट: उपभोक्ता भंडार संचालकों का कहना है कि ज्यादातर उपभोक्ता भंडार का करीब 15 से 20 लाख रुपए बकाया है। सरकार को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हो पा रहा है। आर्थिक संकट बना हुआ है। फार्मा कंपनियां भी पैसा मांग रही है।
अलवर शहर में पेंशनर - 9 हजार
अन्य उपशाखाओं में पेंशनर- 13 हजार
अलवर शहर में पेंशनर शाखा- 15
उपभोक्ता भंडार का बकाया- 80 लाख से अधिक
केस -1
मुुझे बीपी और शुगर की परेशानी हैं। लेकिन आरजीएचएस योजना में दवा नहीं मिल पा रही हैं। बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा लेने पर महंगी मिली रही हैं। इस योजना का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। सुरेश शर्मा, पेंशनर
केस -2
मुझे बीपी और शुगर के अलावा पत्नी की बीमारियों की भी दवा चाहिए होती है मेडिकल स्टोर ने आरजीएचएय योजना से दवा देना बंद कर दिया है। अच्छी कंपनी की दवा महंगी मिलती हैं। अब अपने पैंसों से ही खरीदनी पड़ रही हैं। रमेश कुमार, पेंशन
पेंशनरों को आरजीएचएस योजना के तहत मिलने वाली दवाएं मेडिकल स्टोर से नहीं मिल रही हैं। अलवर में कोई अधिकारी इस योजना के लिए नियुक्त नहीं है। जयपुर में आरजीएचएस योजना के प्रभारी से बात हुई हैं उन्होंने कहा हैँ कि सरकार ने बजट दे दिया हैं अब जल्द ही दवा मिलनी शुरू हो जाएगी।
मधुसुदन शर्मा, जिलाध्यक्ष, पेंशनर समाज, अलवर