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अलवर के यह दो विधायक बन सकते हैं राजस्थान सरकार में मंत्री, कई अन्य नामों पर भी चल रही है चर्चा

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Dec 13, 2018
These MLA's Of Alwar May Become Minister In Rajasthan Government
अलवर के यह दो विधायक बन सकते हैं राजस्थान सरकार में मंत्री, कई अन्य नामों पर भी चल रही है चर्चा

अलवर. विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस सरकार गठन की कवायद तेज हो गई है। सरकार गठन के साथ ही मंत्रिमण्डल में दस्तक देने के लिए जिले से कांग्रेस के कई नेता कतार में हैं। मंत्रिमंडल गठन से पूर्व बुधवार को जिले भर में कांग्रेस विधायकों को मंत्रिमण्डल में शामिल करने को लेकर कयासबाजी का दौर जोरों पर रहा।

अलवर जिले में इस बार कांग्रेस के चार विधायक चुने गए हैं। इनमें अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टीकाराम जूली, राजगढ़-लक्ष्मणगढ से जौहरीलाल मीणा, बानसूर से शकुंतला रावत व कठूमर से बाबूलाल बैरवा शामिल हैं। कांग्रेस की ओर से अब तक सरकार गठन के दौरान अपनाए गए फार्मूले के हिसाब से चारों विधायक मंत्री बनने के लिए फिट हैं। इस बार भी कांग्रेस इन्हीं फार्मूलों में से किसी को अपनाती है तो चारों विधायकों के मंत्री बनने की राह में कोई बाधा नहीं है।
सबसे ज्यादा चर्चा शकुंतला व जूली की

कांग्रेस सरकार के मंत्रिमण्डल में संभवत: अलवर जिले से दो मंत्रियों के शामिल किए जाने के कयास हैं। इसका कारण है कि अलवर जिला राजनीतिक रूप से प्रदेश में प्रमुख स्थान रखता है। वहीं विधानसभा क्षेत्रों के लिहाज से भी कई जिलों से ऊपर है। वहीं भाजपा सरकार में अलवर जिले से दो केबिनेट मंत्री रहे तथा भाजपा के एक नेता को केबिनेट व एक को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस लिहाज से कांग्रेस की नव निर्वाचित सरकार में भी अलवर को मंत्रिमंडल गठन में तवज्जों मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि लोगों की जुबां पर सबसे ज्यादा चर्चा टीकाराम जूली व शंकुतला रावत के नाम की है। हालांकि पार्टी के दो अन्य विधायक भी मंत्रिमण्डल में शामिल होने का दावा रखते हैं, लेकिन चर्चा जूली व शकुंतला रावत के नाम की ज्यादा रही।

इसलिए है इन दो नामों की चर्चा

मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित नेताओ के नामों में टीकाराम जूली व शकुंतला रावत के नाम की चर्चा ज्यादा होने के पीछे कारण है कि शकुंतला रावत लगातार दूसरी बार बानसूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गई हैं। वहीं गत विधानसभा के सत्रों में शकुंतला रावत का प्रदर्शन अच्छा रहा था। रावत पूर्व में जिला पार्षद भी रह चुकी हैं, इस कारण राजनीतिक अनुभव भी कम नहीं है। वहीं जूली की चर्चा का कारण कम उम्र में दूसरी बार विधायक चुने गए, वहीं जिला पार्षद व जिला प्रमुख भी रह चुके हैं। कांग्रेस के वर्तमान में जिलाध्यक्ष हैं। राजनीतिक अनुभव के तौर पर जूली को कम नहीं आंका जा सकता। वहीं जौहरीलाल मीणा व बाबूलाल बैरवा भी राजनीतिक तौर पर अनुभवी हैं, लेकिन प्रदेश में राजनीतिक पकड़ के मामले में जूली व रावत इनसे आगे दिखाई पड़ते हैं।

कई अन्य नामों की भी रही चर्चा

कांग्रेस के मंत्रिमण्डल में शामिल किए जाने वाले संभावित विधायकों में बसपा के दीपचंद खैरिया व संदीप यादव के नाम की भी चर्चा रही। इसका कारण है कि बसपा ने जरुरत पडऩे पर कांग्रेस को समर्थन का ऐलान किया है। राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा है कि बसपा का समर्थन दिए जाने पर सरकार में उसे हिस्सेदारी मिलना तय है। ऐसे में जिले से बसपा के दोनों विधायक मंत्रिमंडल में शामिल होने का दावा रखते हैं। इनमें खैरिया पूर्व में जिला प्रमुख रह चुके हैं तथा कांग्रेस व भाजपा के दिग्गजों को हराकर विधानसभा में पहुंचे हैं। वहीं यादव पूर्व भाजपा सरकार में राज्य युवा बोर्ड के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इन्हें राज्य मंत्री का दर्जा का प्राप्त था। इसके अलावा थानागाजी से दूसरी बार निर्दलीय विधायक बने कांतिप्रसाद मीणा की भी कांग्रेस के बड़े नेताओं से चर्चा हो चुकी है। यदि निर्दलीयों का समर्थन लिया जाता है तो मीणा की दावेदारी को भी नकारा नहीं जा सकता।

Updated on:
13 Dec 2018 11:43 am
Published on:
13 Dec 2018 11:43 am