
अलवर. करीब दो माह पहले काशीराम चौराहे के निकट लावारिश पशु के सींग मारने से एक महिला के पेट में आए 58 टांके अभी ठीक भी नहीं हुए हैं और मंगलवार को दिल्ली दरवाजा के निकट पशु की टक्कर से एक युवक का कान अलग हो गया। इनके अलावा एक साल में ही शहर में कई दर्जन घटनाएं पशुओं के कारण हो चुकी हैं। अदालतों की फटकार के बावजूद नगर परिषद प्रशासन कुछ नहीं कर सका। अब भी शहर में लावारिश पशुओं के कारण शहरवासी असुरक्षित हैं।
देहली दरवाजा के समीट मीणा पाड़ी से बाइक पर जा रहे दो युवाओं को लावारिश पशु ने टक्कर मार कर नीचे गिरा दिया। जिससे एक युवक का कान कट गया। वह बुरी तरह जख्मी हो गया। जिसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां चिकित्सकों ने उसे जयपुर के लिए रैफर कर दिया। पीडि़त के परिजनों ने बताया कि राजेन्द्र कुमार बाइक पर महावीर के साथ मीणा पाड़ी से निकल रहे थे। अचानक एक गाय सामने आ गई। जिसने युवकों को सींग मार दिए। दोनों बाइक सहित नीचे गिर गए। महावीर के कमर में चोट आई है। राजेन्द्र कुमार को अब जयपुर में इलाज चल रहा है। परिजनों का दर्द सामने आया कि आखिर कब तक शहरवासी लीावारिश पशुओं की चपेट में आते रहेंगे। दूध निकालकर पशुओं को ल ावारिश छोडऩे वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार आए दिन पशुओं को पकड़ा जाता है लेकिन शहर से पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही है।
बच्चे, बुजुर्ग, युवा सब चपेट में
लावारिस पशुओं की चपेट में बच्चे व बुजुर्ग ही नहीं युवा भी आ रहे हैं। पशु चलते वाहनों पर हमला कर देते हैं। पैदल लोग तो आए दिन चपेट में आ रहे हैं। कई बुजुर्गों की मौत तक पशुओं की चपेट में आने बाद हुई है। कुछ अभी भी बैड पर हैं। शहर की हर गली, मोहल्ले, बाजार व आम सडक़ों पर पशुओं के झुंड के झुंड खड़े मिलते हैं। जिनसे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कांजी हाउस बनाए जाने के बाद भी शहर में पशु कम नहीं हो पाए हैं।
पिस्ता देवी के आए थे 70 टांके
काशीराम चौराहे के निकट सात फरवरी को 2018 को पिस्ता देवी के पेट में पशु ने सींग घुसा दिए। जिससे पूरा पेट चिर गया। करीब 70 टांके आए। महिला अभी तक पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकी है। इसके बाद स्कीम 10बी में तीन बच्चों सहित एक व्यक्ति को पशुओं ने सींग मारे। मुश्किल से बच्चों की जान बची। काला कुआं में एक बुजुर्ग व्यक्ति पशुओं की चपेट में आ गया। अभी तक पीठ ठीक नहीे हो सकी है।