बारिश के साथ ही बीमारियों ने भी जिले में डेरा डाल लिया है। हर घर खांसी, जुकाम, बुखार ने लोगों को शिकार बना रखा है। खासतौर से कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों की आफत आ गई है। हालत यह है कि अगर दवाई अधूरी छोड़ने वाले मरीज दोबारा वायरल की चपेट में आ रहे हैं।
अलवर.
बारिश के साथ ही बीमारियों ने भी जिले में डेरा डाल लिया है। हर घर खांसी, जुकाम, बुखार ने लोगों को शिकार बना रखा है। खासतौर से कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों की आफत आ गई है। हालत यह है कि अगर दवाई अधूरी छोड़ने वाले मरीज दोबारा वायरल की चपेट में आ रहे हैं। साथ ही अस्थमा के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। इससे जिला अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में 1700 पर पहुंच गई है। इसके साथ ही भर्ती मरीजों का दवाब भी लगातार बढ़ रहा है।
वायरल संक्रमण से लोगों में बुखार, गले में खराश, सिर दर्द और थकान के अलावा लगातार खांसी और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं हो रही है। इसके कारण इन दिनों अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लग रही है। तेज बुखार से पीड़ित करीब 50 मरीज हर दिन भर्ती हो रहे हैं। इसके कारण अस्पताल के मेडिकल वार्ड में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
खास बात यह भी है कि मरीजों में वायरल का नया वैरिएंट देखने का मिल रहा है। बुखार से पीड़ित मरीजों को स्वस्थ होने में तो 7 से 10 दिन का समय लग रहा है, लेकिन खांसी पूरी तरह से 15 दिन में भी खत्म नहीं हो पा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल बुखार में मरीज को स्वस्थ होने में करीब 5 से 7 दिन का समय लगता है, लेकिन कुछ मरीज थोड़ी राहत मिलते ही बीच में ही दवाएं लेना छोड़ देते हैं, इसके कारण उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है।
बारिश से मौसमी बीमारियों का ग्राफ बढ़ा है। बीमार होने पर मास्क या गमछे का उपयोग करें। ताकि परिवार के अन्य सदस्यों में वायरस का संक्रमण नहीं फैले। साथ ही भोजन करने से पहले हाथों को जरूर धोएं। ठंडी खाद्य सामग्री से परहेज करें, क्योंकि इससे जुकाम होने की संभावना रहती है। इसके कारण वायरल का खतरा भी बढ़ जाता है।
डॉ. सुरेश मीना, सीनियर फिजिशियन, सामान्य अस्पताल