
अलवर. 46 डिग्री तापमान पर जिले भर में पानी के लिए हाहाकार मचा है, लोग तपती धूप में सडक़ों पर आंदोलन को मजबूर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कार्यालयों में बैठकर कागजी आदेशों में ही जनता की प्यास बुझा रहे हैं। हालत यह है कि हर दिन लोगों के पानी के लिए सडक़ों पर उतरने के बावजूद न तो जलदाय विभाग और न ही प्रशासनिक अधिकारी लोगों की परेशानी की सुध लेने अब तक उनके क्षेत्र में नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं जिला प्रशासन ने पानी की समस्या के निराकरण के लिए अब तक पार्षद या अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पेयजल समस्या के निराकरण के प्रयास भी नहीं किए हैं।
इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है, तापमान ४६ डिग्री को पार कर चुका है, जिले भर लोग पेयजल संकट से परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात दूर, जिला मुख्यालय पर हर रोज पानी की मांग को लेकर जाम व प्रदर्शन किए जा रहे हैं। नौबत हाथापाई तक पहुंचने लगी है। पेयजल संकट के चलते वार्डों एवं मोहल्लों में लोगों के बीच संघर्ष की स्थिति बनने लगी है। इसके बावजूद जिला प्रशासन एवं जलदाय विभाग के अधिकारियों के पेयजल समस्या निराकरण के प्रयास आगे नहीं बढ़ पाए हैं।
बैठकों में मॉनिटरिंग से ज्यादा नहीं कार्रवाई
प्रशासन वैसे तो गर्मी में पेयजल आपूर्ति को लेकर कार्ययोजना बनाने की तैयारी सर्दी के मौसम में ही शुरू कर देता है। बैठकों में निर्देश देने का यह क्रम सर्दी में शुरू होकर गर्मी का सीजन खत्म होने तक जारी रहता है, लेकिन जरूरतमंद लोगों को पानी नहीं मिल पाता। जिला प्रशासन की ओर से हर सप्ताह पानी, बिजली व मौसमी बीमारियों को लेकर बैठक का आयोजन होता है, इन बैठकों में जिला कलक्टर या समकक्ष प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से पेयजल समस्या के निराकरण को लेकर निर्देश भी दिए गए, लेकिन इन निर्देशों की पालना नहीं हो पाने का नतीजा है कि लोग पानी के लिए सडक़ों पर उतरने का मजबूर है।
न पानी की सैल और न ही अधिकारी पहुंचे संकटग्रस्त क्षेत्रों में
इन दिनों जिले की सबसे बड़ी समस्या पानी की है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट परिसर में पानी की समस्या दर्ज कराने के लिए कोई प्रकोष्ठ स्थापित नहीं किया गया है। जिला मुख्यालय या ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल किल्लत की हकीकत जानने के लिए न जिला कलक्टर और न ही अतिरिक्त जिला कलक्टर व उपखंड अधिकारी संकटग्रस्त क्षेत्रों में पहुंंचे हैं।
जनप्रतिनिधियों से राय तक नहीं ली गई
अलवर शहर एवं जिले भर में पानी के लिए हाहाकार के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक तक नहीं की गई। जबकि एेसीे बैठकों से समस्या का हल खोजने के साथ ही वार्ड व मोहल्लों मे होने वाले संघर्ष की घटनाओं से बचा जा सकता है।
पानी की समस्या का कारण निचले स्तर पर कार्य में कोताही है। पानी व लोगों की अन्य समस्याओं के निराकरण लिए जिला प्रशासन की ओर से नई व्यवस्था शुरू की गई है, इसमें महीने के दूसरे व चौथे शनिवार को ओआईसी की बैठक होगी। इसमें सभी ब्लॉकों के प्रशासनिक अधिकारियों सहित जिला स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहकर समस्याओं पर चर्चा करेंगे और निराकरण की कार्ययोजना बताएंगे। वहीं विभागीय व प्रशासनिक अधिकारी समस्याग्रस्त क्षेत्रों में जाकर खुद समस्याओं का आंकलन करेंगे। इसके अलावा महीने के पहले व चौथे शनिवार को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये सभी ओआईसी व विभागीय अधिकारियों से समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। इन समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए जाएंगे। अब जन समस्याओं के निराकरण में केवल विभागीय अधिकारी ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी की भी भूमिका सुनिश्चित की जाएगी। लोकसभा चुनाव के चलते यह नई व्यवस्था पिछले दिनों ही शुरू की गई है।
इंद्रजीत सिंह
जिला कलक्टर अलवर