राजस्थान में मौसम के बदलते मिजाज ने एक बार फिर किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। प्रदेश में मौसम विभाग की ओर से जारी बारिश और अंधड़ के पूर्वानुमान के बीच सोमवार को अलवर के प्रतापगढ़ में दोपहर करीब ढाई बजे मौसम ने अचानक करवट ली और रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया।
राजस्थान में मौसम के बदलते मिजाज ने एक बार फिर किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। प्रदेश में मौसम विभाग की ओर से जारी बारिश और अंधड़ के पूर्वानुमान के बीच सोमवार को अलवर के प्रतापगढ़ में दोपहर करीब ढाई बजे मौसम ने अचानक करवट ली और रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया। देखते ही देखते आसमान काले बादलों से घिर गया और ठंडी हवाओं के साथ शुरू हुई इस बूंदाबांदी ने किसानों की धड़कनें तेज कर दी हैं।
न केवल प्रतापगढ़, बल्कि अलवर जिले के कोटकासिम कस्बा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी मौसम का यही हाल देखने को मिला, जहां हल्की बारिश ने रबी की फसलों के लिए चिंता पैदा कर दी है। वर्तमान में अलवर के खेतों में गेहूं की फसल पूरी तरह पककर तैयार है। अलवर और कोटकासिम के क्षेत्रों में किसान इन दिनों फसल की कटाई और थ्रेसिंग के काम में दिन-रात जुटे हुए थे, लेकिन अचानक हुई इस बारिश ने पूरे काम पर ब्रेक लगा दिया है।
खेतों में गेहूं की फसल या तो कटकर पड़ी है या पूरी तरह सूखकर कटने को तैयार खड़ी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में यदि बारिश के साथ तेज अंधड़ चलता है, तो खड़ी फसल जमीन पर बिछ सकती है। इससे न केवल दाना काला पड़ सकता है, बल्कि उसकी चमक और वजन में भी गिरावट आने की आशंका है, जिससे किसानों को बाजार में उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा बुलेटिन ने किसानों की रातों की नींद और अधिक उड़ा दी है।
विभाग ने आगामी 31 मार्च तक अलवर और आसपास के जिलों में तेज अंधड़ और बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। चिंता यह है कि पिछले कुछ दिनों से पूरा इलाका गर्मी की तपिश महसूस कर रहा था, लेकिन इस अचानक हुए बदलाव ने फसलों की बर्बादी का डर पैदा कर दिया है। मौसम विशेषज्ञों का यह भी अनुमान है कि यह मौसमी उथल-पुथल केवल मार्च के अंत तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अप्रैल के पहले सप्ताह में भी रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
खेतों के अलावा जिले की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में भी संकट की स्थिति बनी हुई है। मंडियों में इन दिनों सरसों की आवक हो रही है, जहां पर्याप्त ढकाव और सुरक्षा के अभाव में किसानों की उपज खुले में रखी हुई है। यदि बारिश का दौर तेज होता है, तो सरसों के भीगने से उसकी गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होगी। साल भर की कड़ी मेहनत के बाद जब फसल घर आने का समय आया है, तब कुदरत के इस बदलते मिजाज ने अन्नदाता की सारी उम्मीदों पर पानी फेरने की तैयारी कर ली है। किसान अब ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि आसमान साफ हो जाए ताकि उनकी खून-पसीने की कमाई सुरक्षित घर पहुंच सके।