सरिस्का व रणथंभोर राजस्थान के प्रमुख टाइगर रिजर्व हैं, लेकिन पर्यटकों के घूमने एवं सरकार को होने वाली आय के मामले में दोनों में दस गुना से भी ज्यादा का अंतर है। आखिर वे कौनसी वजह है, जो रणथंभौर को सरिस्का से आगे किए हुए हैं।
अलवर. प्रदेश के टाइगर रिजर्व में सरिस्का की ख्याति तो है, लेकिन पर्यटक एवं उनसे होने वाली आय के मामले में वह रणथंभोर से काफी पीछे है। रणथंभौर में हर साल करीब पांच लाख पर्यटक भ्रमण के लिए आते हैं, वहीं सरिस्का में यह आंकड़ा अभी 50 हजार ही पहुंच पाया है। यही कारण है कि सरिस्का में पर्यटन को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है।
सरिस्का में एक साल में बढ़े 5 हजार पर्यटक
सरिस्का में एक साल में पर्यटकों की संख्या में करीब पांच हजार की वृदि्ध हुई और आय करीब सवा दो करोड़ हुई। वहीं रणथम्भौर में एक साल में एक लाख पर्यटक बढ़ गए। वहीं इनसे होने वाली आय भी बढ़कर 46 करोड़ तक पहुंच गई।
पर्यटन से आय के आंकड़े...
रणथंभोर
2017- 18 34 करोड
2018-19 36 करोड़
2019-20 38 करोड़
2020-21 39 करोड़
2021-22 40 करोड़
2022-23 46 करोड़
सरिस्का में
2017- 18 1.39 करोड
2018-19 1.42 करोड़
2019-20 1.54 करोड़
2020-21 54 लाख
2021-22 2.18 करोड़
2022-23 2.25 करोड़
रणथंभोर में पहुुंच रहे पांच लाख पर्यटक
रणथंभोर के वन अधिकारियों के अनुसार पर्यटन सत्र 2022-23 में रणथम्भौर में पांच लाख 31 हजार से अधिक देशी- विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं। वहीं पिछले सत्र 2021-22 में यह आंकड़ा 4 लाख 31 हजार के करीब था। जबकि सरिस्का में वर्ष 2022-23 में 56 हजार 183 रहा, वहीं पिछले सत्र 2021-22 में सरिस्का में पर्यटकों का आंकड़ा 51 हजार 69 तक ही पहुंच पाया।
सुविधाओं का हो विस्तार तो बढ़े पर्यटन
टाइगर रिजर्व सरिस्का व रणथंभोर की भौगोलिक िस्थति में ज्यादा अंतर नहीं है, दोनों ही टाइगर रिजर्व लगभग समान है। सरिस्का में वर्तमान में 28 बाघ हैं, वहीं रणथंभोर में बाघों का कुनबा 70 के पार है। इस कारण रणथंभोर में बाघों की साइटिंग की संभावना ज्यादा रहती है। वहीं रणथंभोर में पर्यटकों को अच्छे होटल व अन्य बुनियादी सुविधाएं भी आसानी से मिल जाती है। सरिस्का के आसपास अच्छे होटलों का निर्माण हो तथा पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं बढ़े तो यहां भी पर्यटन बढ़ने की अपार संभावना है। दिल्ली- मुम्बई एक्सप्रेस वे शुरू होने के बाद सरिस्का की कनेक्टिविटी रणथंभोर से बेहतर हुई है।