
बानसूर (अलवर) . कस्बे के अलवर बायपास रोड पर अधोपिया की ढाणी निवासी युवक 43 साल की उम्र में 33 साल बाद घर लौटा तो परिवार, पड़ोसियों व रिश्तेदारों में खुशियों की बहार आ गई। ढाणी में पहुंचने पर सब अचंभित हो गए। उसकी पत्नी की मांग फिर सिंदूर से भर गई।
यह कहानी हनुमान सैनी की है, जो 1989 को वह अपनी पत्नी को काम पर जाने की कहकर घर से निकला था। वह खारी बावड़ी में काम करता था। घर से काम पर जाने के बाद नहीं लौटा तो उस समय परिजनों ने दिल्ली जाकर तलाश किया, लेकिन कोई पता नहीं लगा। आस-पड़ोस रिश्तेदारों में भी युवक के भाई एवं रिश्तेदारों ने तलाश किया, लेकिन पता नहीं चलने पर युवक की पत्नी और परिजन थक हार कर बैठ गए। युवक के घर में उस समय बड़ा बेटा 2 वर्ष का था एवं छोटा बेटा छह माह का था। दिन महीने और साल गुजर गए। बच्चे बड़े हो गए। बच्चों ने भी अपने पिता की तलाश के प्रयास किए, लेकिन कोई पता नहीं चलने पर महिला ने अपने दोनों पुत्रों एवं तीनों पुत्रियों की शादी भी कर दी। एकाएक अब 33 साल बाद घर लौटे अपने पति को देखकर पत्नी की आंखों में आंसू आ गए। घर लौटने की बात का ढाणी सहित पड़ोस के लोगों को पता चला तो लोग उस घर पर पहुंचने लगे। पिता को देखकर दोनों पुत्रों की आंखें भी भर आई। घर से गए युवक ने 33 साल की अपनी कहानी बताई तो सब आश्चर्यचकित हो गए। दूर के रिश्तेदारों का भी घर पर जमावड़ा लग रहा है।
ऐसे बीता समय
हनुमान सैनी ने बताया कि दिल्ली में काम करता था। तभी 1989 में एकाएक मन में माता की सेवा करने की भावना जागृत हुई और वह स्टेशन जाकर ट्रेन में बैठ गया। वहां से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में पहुंच गया। वहां 33 साल तक मंदिर में कांगड़ा माता की सेवा की। इसी दौरान गंगासागर और काली मां के भी दर्शन करने गया और जीवन बसर करता रहा। चार दिन पूर्व अष्टमी के दिन एकाएक घर लौटने की भावना जाग्रत हुई और गोगामेड़ी के दर्शन कर ट्रेन से खैरथल पहुंचा। खैरथल से ततारपुर चौराहे पर पैदल आकर मंगलवार सुबह स्वास्तिया हनुमान मंदिर पर दर्शन कर घर की ओर चल पड़ा। जहां सब कुछ बदला पाया। हनुमान सैनी ने बताया कि घर से दिल्ली काम पर जाते समय हनुमानजी के दर्शन कर के गया था और आकर भी हनुमानजी के दर्शन किए।
परिजनों ने मृत मानकर बनवाया मृत्यु प्रमाण-पत्र
परिजनों ने बताया कि हनुमान सैनी के नहीं मिलने पर उसके लौटने की आस छोड़ दी। उसके दो पुत्र रामचंद्र सैनी एवं बल्लू सैनी ने गत वर्ष वकील की सलाह पर जमीन अपने नाम करवाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश पर गत अप्रेल में हनुमान सैनी का मृत्यु प्रमाण-पत्र भी बनकर तैयार हो गया।