
अलवर। Jobs and Career : अब तक परिवार अपने बच्चों को नौकरी के लिए गुरुग्राम, दिल्ली आसपास ही भेजते थे ताकि वह वीकएंड में आते-जाते रहें लेकिन अब युवा तरक्की चाहते हैं। ऐसे में वह घर छोड़कर दूसरे शहरों की ओर निकल रहे हैं। बंगलुरू, चेन्नई, मुंबई आदि शहरों में नौकरी के लिए जा रहे हैं। बाहर नौकरी करने वालों में सर्वाधिक इंजीनियर हैं, जिनको कंपनियां मोटा पैकेज देती हैं।
मां को समझाया फिर बेटा नौकरी के लिए बेंगलूरू पहुंचा
एसबीआई बैंक में काम कर रहे अंबेडकर नगर निवासी लेखराज शर्मा का कहना है कि उनका बेटा हिमांशु शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वहीं नौकरी मिल गई। हम भी यही चाहते थे कि बेटा पास में रहे। नौकरी के दो साल बाद बेटे ने कहा कि अब उन्हें घर का मोह छोड़ना पड़ेगा। तरक्की के लिए उड़ान भरनी होगी। हिमांशु की मां नहीं चाहती कि बेटा दूर जाए लेकिन बेटे ने बंगलुरू में एक विदेशी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जॉब पाई। सालाना पैकेज करीब लाखों रुपए का है।
बेटे का सालाना पैकेज बड़ी राशि का :
इसी तरह कलक्ट्रेट में काम कर रहे लिपिक सुरेश मीणा का कहना है कि उनके बेटे सुशांत मीणा ने भी दिल्ली से इंजीनियर की पढ़ाई की। नौकरी गुरुग्राम में शुरू की। शुरूआत में सालाना पैकेज कम था, लेकिन अब ऑफर मुंबई से आ गया। हम नहीं चाहते थे कि बेटा दूर जाए लेकिन उसे तरक्की चाहिए इसलिए हमने अनुमति दे दी। आज वह पहले से डेढ़ गुना पैकेज पर इंजीनियर कंपनी में काम कर रहा है। कहते हैं कि बेटे की तरक्की जरूरी है। दूरी तो तरक्की से ही कम हो जाएगी।