राज बब्बर ने गठबंधन पर किया बड़ा खुलासा, इसलिए अखिलेश यादव की हुई बड़ी हार
अम्बेडकर नगर. पिछले विधानसभा के चुनाव में भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में दोनों पार्टियों की तरफ से एक बड़ा नारा भी निकल कर सामने आया था 'यूपी को यह साथ पसंद है'। हालांकि यूपी की जनता ने इस साथ को बिल्कुल भी पसंद नहीं किया अौर राजनीतिक गलियारे में इस साथ कि काफी खिल्ली भी उड़ाई गई। उसके बावजूद इस गठबंधन को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा था कि वे जिससे दोस्ती करते हैं, उसमे फिर नफा या नुकसान नहीं देखते हैं। इसलिए यह गठबंधन आगे भी कायम रहेगा।
सपा और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर जो बयान अखिलेश यादव दे रहे थे, उसकी सच्चाई 6 महीने बाद ही लोगों के सामने आ गई और नगर निकाय के चुनाव में सपा और कांग्रेस ने अलग अलग होकर चुनाव लड़ा, जिसका परिणाम यह रहा कि कई ऐसी सीटों पर दोनों पार्टियों को हार का मुंह देखना पड़ा, जहां दोनों मिलकर चुनाव लड़ते जीत हो सकती थी।
यहां सपा और कांग्रेस को निर्दलीय ने ऐसे दी मात
अम्बेडकर नगर जिले की नगर पालिका अकबरपुर, नगर पंचायत इल्तेफ़ात गंज और नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा तीन ऐसे नगर निकाय हैं जहां सपा और कांग्रेस के अलग अलग चुनाव लड़ने से ये सीटें दूसरे के खाते में चली गईं। परिणाम यह रहा कि नगर पंचायत अशरफ पुर किछौछा में सपा बसपा और कांग्रेस तीनो पार्टियों को धूल चटाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी शबाना खातून ने तीन हजार एक सौ दो मत प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस के राधेश्याम को एक हजार 9 सौ 29 मत और सपा के फैजान अहमद को एक हजार 8 सौ 40 मत मिले। अगर ये दोनों यहां एक साथ मिलकर चुनाव लड़े होते तो जीत पक्की थी। यही हाल नगर पंचायत इल्तेफ़ात गंज की भी रही।
जिला मुख्यालय की अकबरपुर नगर पालिका से भाजपा की प्रत्याशी सरिता गुप्ता 15 हजार 8 सौ 44 मत पाकर निर्दल प्रत्याशी नाजरीन बानों से 6 हजार 9 सौ 52 मतों से चुनाव जीत गईं। इस सीट पर कांग्रेस की रंजना पांडेय को 8 हजार 94 वोट और सपा की मालती वर्मा को 6 हजार दो सौ एक वोट मिला। माना जा रहा है कि अगर यहां से सपा और कांग्रेस गठबंधन करके चुनाव लड़ते तो जीत पक्की थी।
ये बोले थे राजबब्बर
अम्बेडकर नगर में नगर निकाय प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने आये कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर से किछौछा में जब पत्रकारों ने सवाल किया था कि विधानसभा में यूपी को सपा और कांग्रेस का साथ पसंद था तो फिर इस चुनाव में यह साथ क्यों नहीं। इस पर राज बब्बर ने चलते-चलते जवाब दिया था कि यह बहुत ही छोटा चुनाव है, जो सिर्फ कार्यकर्ता ही लड़ता है। सवाल यह उठता है कि जब यह छोटा चुनाव था तो राजबब्बर यहां क्यों आये थे और अगर यह छोटा चुनाव था तो कांग्रेस ने इसे जीत क्यों नहीं लिया। फिलहाल इस चुनाव सपा और कांग्रेस का साथ छोड़कर अलग ही जाना इस चुनाव में कई जगहों पर नुकसान उठाना पड़ा है।