अम्बेडकर नगर

इस महिला की कहानी सुन रो पड़ेंगे आप, मां-बाप की मौत के बाद पति ने भी दे दिया तलाक

माँ बाप की हुई मौत, पति ने घर से निकाला अब न्याय की आस में तीन साल के बेटे के साथ दर दर की ठोकरें खा रही है यह महिला  
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Updated: 1 Jun 2018, 12:57 PM IST
ambedkara nagar
इस महिला की कहानी सुन रो पड़ेंगे आप, मां-बाप की मौत के बाद पति ने भी दे दिया तलाक

अम्बेडकर नगर. जिले के टांडा तहसील परिसर में एक महिला पिछले एक महीने से अपने तीन साल के बेटे के साथ भटक रही है। इस महिला की पूरी कहानी आपको बतायें उससे पहले आप देख ले कि इस लाचार महिला के एक हाथ में शिकायती पत्रों की पॉलीथिन है और दूसरे हाथ में इसके मासूम बच्चे का हाथ, किस्मत और कुदरत की मारी दर दर भटक रही यह महिला सुनीता है, जो इसी तहसील क्षेत्र की निवासी है। पांच साल पहले सुनीता की शादी हुई थी कुछ ही दिनों बाद इसके पति ने दूसरी शादी कर ली और मासूम बच्चे के साथ तलाक दे दिया। पति से धोखा खाई सुनीता जब अपने मायके पहुंची तो इसे इसके चाचाओं ने घर में घुसने नहीं दिया।

चाचा ने कर दिया बेघर

सुनीता के माता पिता पहले ही मर चुके है और सुनीता अपने पिता की इकलौती संतान है। सुनीता की मां-बाप के मरने के बाद उनके हिस्से की जमीन को सुनीता के चाचाओं ने कब्ज़ा कर लिया। अपने पैतृक जमीन की लड़ाई और अपनी ज़िन्दगी और आशियाने के लिए जिले के हर आला अधिकारियों की चौखट नाप चुकी है, लेकिन अभी तक कहीं से न्याय नहीं मिल पाया है। महीनों से न्याय की गुहार लगा रही सुनीता अब अपने मासूम बच्चे के साथ तहसील परिसर को ही अपना ठिकाना बना चुकी है।

शासन और प्रशासन की खुली पोल

प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फरमान है कि जिला और तहसील मुख्यालय पर सुबह 9 बजे ही सारे अधिकारी अपने अॉफिस पहुंच कर लोगों की समस्या सुनकर उसका निस्तारण करेंगे। इसके अलावा आईजीआरएस पोर्टल, मुख्यमंत्री पोर्टल आदि के माध्यम से शिकायतों का निस्तारण करने का सभी अधिकारियों को निर्देश हैं, लेकिन तहसील परिसर और बगल में कोतवाली टांडा, जहां यह महिला दिन रात अपने बेटे के साथ भटक रही है, लेकिन किसी भी अधिकारी की नजर इस महिला पर नहीं पड़ रही है।


इस महिला पर पत्रिका की नज़र पड़ी और इस तरह घूमने वाली महिला के बारे में जानकारी की तो प्रशासनिक व्यवस्था की लचर व्यवस्था की पोल खुलती नजर आई। सुनीता ने अपनी पालीथीन से अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्रों को निकाल कर दिखाया, जिसमें कई बड़े अधिकारियों ने प्रार्थना पत्रों पर आदेश भी किया, लेकिन इन आदेशों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और सुनीता दर दर भटकने को मजबूर है।

कभी भी हो सकती है गंभीर वारदात

दर दर की ठोंकरे खा रही इस महिला की उम्र महज 25-30 साल की होगी और समाज में तरह तरह के अपराधी टहल रहे हैं। दिन में तो तहसील परिसर में सैकड़ों लोग रहते हैं, लेकिन रात में यह परिसर सुनसान हो जाता है। ऐसे में इस महिला के साथ कभी भी कोई गंभीर वारदात हो सकती है। स्थानीय तहसील के अधिवक्ताओं ने बताया कि ये लाचार महिला कई महीनों से अधिकारियों के चक्कर लगा रही है और अधिकारियों के नाक के नीचे इसी तहसील परिसर में रात और दिन अपने मासूम बच्चे के साथ रहती है। जिसके साथ कभी भी इसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

इन अधिवक्ताओं ने अधिकारियों सहित सरकार पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पहले तो इसके पैतृक जमीन में इसको रहने नहीं दिया जा रहा है, जिसको लोंगो ने कब्ज़ा लिया है और जब इस महिला के पास रहने और खाने का जुगाड़ नहीं तो ऐसे में उसका बच्चा स्कूल भी नहीं जा सकता है, जो कि उसका अधिकार है। अधिवक्ताओं ने कहा की प्रशासन आंख मूंदे बैठा है एक महिला को न्याय नहीं दिला पा रहा है, जबकि ये खाना, आशियाना और पढ़ाई इसका अधिकार है जो कुर्सी पर बैठी सरकारें दावा करती है। फिलहाल इस महिला को तहसील के अधिवक्ता खाने पीने का खर्च दे देते हैं, जिसके सहारे यह अपना और अपने बच्चे का पेट भर रही है।

Updated on:
1 Jun 2018, 12:57 PM IST
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