अम्बेडकर नगर

सपा की इस महिला नेता ने किया ऐसा फर्जीवाड़ा कि जा सकती है नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी

सपा की इस महिला नेता ने किया ऐसा फर्जीवाड़ा कि जा सकती है नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी
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अम्बेडकर नगर. गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव में सपा को मिली जीत की खुशी के बाद अब इस पार्टी के लिए एक ऐसी खबर है, जो न सिर्फ सपा के लिए दुखभरी साबित होगी, बल्कि समाजवादी पार्टी की छवि को भी दागदार करके रख देगी और वह भी अपनी पार्टी की एक नेता की करतूतों के कारण। जी हां गत वर्ष सम्पन्न हुए नगर निकाय चुनाव में जिले के नगर पालिका परिषद टाण्डा में सपा प्रत्याशी नसीम रेहाना को मिली शानदार जीत बहुत ज्यादा समय तक खुशी नहीं दे सकी और अब दुख के बादल पूरी समाजवादी पर मंडराने लगा है।


दरअसल टाण्डा नगर पालिका के गत चुनाव में अध्यक्ष पद की कुर्सी पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित थी और इस पद के लिए समाजवादी पार्टी ने नसीम रेहाना को टिकट देकर मैदान में न सिर्फ उतारा बल्कि एक शानदार जीत भी दर्ज की, लेकिन अब चुनाव के एक साल भी नहीं पूरे हुए कि नसीम रेहाना के खिलाफ उनके पिछड़ी जाति के प्रमाण-पत्र को फर्जी बताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव रदद् करने के साथ ही नसीम रेहाना के खिलाफ जालसाजी और कूट रचना करने के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है।

गंभीर है यह शिकायत

सपा की निर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष नसीम रेहाना के खिलाफ की गई शिकायत में उनके द्वारा नामांकन पत्र के साथ दाखिल किए गए पिछड़ी जाति के जारी प्रमाण-पत्र को झूठा और कूट रचित बताते हुए कार्रवाई की करने की मांग निर्वाचन आयोग से की गई है। शिकायत में कहा गया है कि सपा प्रत्याशी नसीम रेहाना ने अपने नामांकन पत्र के साथ जाति के सम्बंध में जो शपथ-पत्र दाखिल किया है, उसमे बताया गया है कि तहसीलदार टाण्डा द्वारा दिनांक 30 जून 2000 को पिछड़ी जाति का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। जिसके अनुसार वे पिछड़ी जाति की रंगरेज हैं।


शिकायतकर्ता द्वारा सपा नेता नसीम रेहाना के पुराने रिकार्ड खंगालने के बाद सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जो अभिलेख प्राप्त किये हैं, उसके अनुसार तो नसीम रेहाना पिछड़ी जाति की रंगरेज न होकर सामान्य जाति की सिद्दीकी हैं। अपने शिकायत के समर्थन में शिकायतकर्ता ने नसीम रेहाना के विद्यालय में प्रवेश के दौरान उनके पिता द्वारा प्रवेश फार्म भरते समय जाति के कालम में सिद्दीकी लिखा गया है। शिक्षा विभाग ने इस सम्बंध में सूचना अधिकार के तहत जो सूचना उपलब्ध कराई है उसमें कहा गया है कि जन सूचना के तहत मांगी गई सूचना में नसीम रेहाना की जाति एस आर नंबर 379 के जाति के कालम में सिद्दीकी अंकित है।

शिकायतकर्ता ने तहसील टाण्डा से सूचना के अधिकार के तहत यह सूचना भी प्राप्त की है कि सिद्दीकी जाति पिछड़ी जाति के अंतर्गत आता है अथवा नहीं। इस सम्बंध में तहसीलदार टाण्डा द्वारा जो सूचना दी गई है, उसके अनुसार सिद्दीकी जाति सामान्य जाति के अंतर्गत आता है।

फर्जी प्रमाण-पत्र के जरिये अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने का आरोप

नगर पालिका टाण्डा के अध्यक्ष पद की कुर्सी हथियाने का आरोप नसीम रेहाना पर लग रहा है और इस संबंध में शिकायत के साथ जो अभिलेख दिए गए हैं, उसके अनुसार शिकायत में काफी सत्यता भी नजर आ रही है। नसीम रेहाना एक पढ़ी लिखी महिला और पेशे से अधिवक्ता हैं, जिनका उत्तर प्रदेश बार काउंसिल इलाहाबाद से पंजीकरण हुआ है। बार काउंसिल में इनका पंजीकरण संख्या UP06774 है और पंजीकरण तिथि 23 नवम्बर 1994 अंकित है, जिसमे इनका पूरा नाम नसीम रेहाना सिद्दीकी अंकित है।

प्रशासन ने शुरु की जांच

पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित नगर पालिका टाण्डा के अध्यक्ष पद पर धोखाधड़ी पूर्ण ढंग से समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़कर जीत तो नसीम रेहान ने दर्ज करा ली है, लेकिन इस धोखाधड़ी के कारण पिछड़ी जाति की महिलाओं का हक मारा गया है। इस गंभीर मामले में अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुकी शहनाज बानो के पति मोहम्मद अयाज और भाजपा की टिकट पर नगर पालिका टाण्डा से सदस्य निर्वाचित आरती केडिया ने राज्य निर्वाचन आयोग के साथ ही जिला प्रशासन से शिकायत की है, जिसके कर्म में जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी ने जांच शुरू कर दिया है और नसीम रेहाना को मूल प्रमाण-पत्रों के साथ तलब किया है।

अगर शिकायत सही मिली तो कई लोगों की बढ़ सकती है मुश्किल

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत के साथ जो अभिलेख प्रस्तुत किये हैं, उसमें यह तो सच्चाई है कि वर्ष 2000 में नसीम रेहाना को रेहाना के नाम से पिछड़ी जाति रंगरेज का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है, लेकिन इनके विद्यालय प्रवेश के रिकॉर्ड के अनुसार जो जाती लिखी गई है, वह सामान्य जाति की सिद्दीकी है। इस प्रकार तहसील से जारी किया गया प्रमाण-पत्र संदिग्ध हो जाता है और इस प्रमाण-पत्र के जारी होने में तहसील के कर्मचारियों का रोल भी संदेह के घर में आ गया है। ऐसे में जांच के बाद अगर यह जाति प्रमाण-पत्र गलत पाया गया तो न सिर्फ नसीम रेहाना, बल्कि संबंधित लेखपाल, राजस्व निरीक्षक और अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी गाज गिरेगी।

Updated on:
12 Apr 2018 02:32 pm
Published on:
12 Apr 2018 10:51 am
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