अंबिकापुर

CG में एक यूनिवर्सिटी ऐसी भी जहां परीक्षा दिए बिना ही मनचाहे डिवीजन की मिलती है मार्कशीट

हजारों लोगों की अब तक बनाई गई है मार्कशीट, प्रथम कुलपति ने आरोप लगाते हुए कुलाधिपति से की है यूनिवर्सिटी की शिकायत

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अंबिकापुर. कहो जी तुम क्या-क्या खरीदोगे, सुनो जी तुम क्या-क्या खऱीदोगे, यहां तो हर चीज बिकती है...। 1958 में 'साधना' फिल्म की यह पंक्तियां सरगुजा विश्वविद्यालय पर पूरी तरह चरितार्थ हो रहीं हैं। विश्वविद्यालय पर बिना परीक्षा व प्रैक्टिकल के ही हजारों मार्कशीट जारी करने का आरोप प्रथम कुलपति सुनील वर्मा ने लगाया है। उन्होंने कुलाधिपति से मामले की शिकायत की है। इधर कुलपति प्रथम कुलपति से मिलने का समय भी नहीं दे रहे हैं।


तात्कालीन कुलपति ने शिकायती पत्र में कहा है कि 2005 से पूर्व सौ से अधिक निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई थी। स्टेट इंस्टीट्यूट इसी दौरान बना था। स्टेट इंस्टीट्यूट के पास भवन, शिक्षक, प्रयोगशाला कुछ भी नहीं था। स्टेट इंस्टीट्यूट के पास जारी अंकपत्रों वाले विषयों के पाठ्यक्रम और ऑर्डिनेंस भी नहीं थे।

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स्टेट इंस्टीट्यूट ने 2006 तथा 2007 तक विश्वविद्यालय के रूप में संस्था चलाई। शिकायत पत्र में कहा गया है कि स्टेट इंस्टीट्यूट का संचालन सर्वोच्च न्यायालय का सीधा-सीधा उल्लंघन था। नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने के दौरान उच्च शिक्षा विभाग और कुलपति कार्यालय मौन रहा। स्टेट इंस्टीट्यूट ने कभी अपना पता बिलासपुर बताया तो कभी अंबिकापुर।

स्टेट इंस्टीट्यूट का सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीएल शर्मा तथा कुलसचिव आरडी शर्मा के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध थे। नाइसटेक कॉलेज सकरी बिलासपुर में छल करते हुए कागजों में परीक्षा दर्शा दी। 2 मई 2013 को 72 विषयों में परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। ६४५ से अधिक अंकपत्र पर सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलसचिव आरडी शर्मा के हस्ताक्षर हैं।

प्रथम श्रेणी में सभी मार्कशीट प्राप्तकर्ताओं को 65 से 70 फीसदी अंक दिये गये। जारी अंक पत्र में बी-टेक, एम फिल, भौतिकी, रसायन, वनस्पतिशास्त्र, जैव प्रोद्यौगिकी, एमबीए, एमएससी, बीएससी, बी.कॉम, एमकॉम, एमए की उपाधि दी गई। इस दौरान नाइसटेक कॉलेज सरगुजा विश्वविद्यालय के अधीन था।

परीक्षा के नाम पर सरगुजा विश्वविद्यालय द्वारा कोई प्रायोगिक परीक्षा लेने के लिए भी नहीं भेजा गया था। शिकायती पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि जिन कक्षाओं के लिए केन्द्रीय नियामक आयोग (एआइसीटीई) की अनुमति की आवश्यकता है। वहां अनुमति अनिवार्य है।

बी-टेक, एमबीए आदि कक्षाओं के लिए मान्यता नहीं ली गई। बल्कि प्रत्येक अंक पत्र में लिखा गया है कि अंक सूची सर्वोच्च न्यायालय के आदेश तथा परिनियम 27/ए के परिपालन में किया जा रहा है। 21 अप्रैल 2014 तथा 27 मई 2014 का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया। 50 विषयों में 400 से अधिक को प्रथम श्रेणी भी उपलब्ध करा दिया गया।


प्रो. रोहिणी प्रसाद को कराया है अवगत
प्रथम कुलपति सुनील वर्मा ने शिकायती पत्र में कहा है कि मामले से वर्तमान कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद को अवगत कराया गया है। उन्होंने सीबीआई से जांच कराने का आश्वासन भी दिया था लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी कोई भी सकारात्मक पहल नहीं दिखी।


विश्वविद्यालय के लिए यह है दुर्भाग्यपूर्ण
सरगुजा विश्वविद्यालय के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विश्वविद्यालय की गरिमा को सम्भालने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। मैंने कुलपति, सरगुजा के पुलिस महानिरीक्षक तथा वर्तमान कुलपति से मिलने के लिए समय मांगा है। मिलने पर और तथ्यों से अवगत कराया जाएगा।
प्रो. सुनील कुमार वर्मा, प्रथम कुलपति, सरगुजा विवि

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Published on:
27 May 2018 05:24 pm
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