अंबिकापुर

भाइयों को राखी बांधने में आधार कार्ड का अडंगा, जेल के दरवाजे से मायूस लौटीं बहनें

सुबह से जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने लगी रही भीड़, 1956 लोगों ने राखी बांधने कराया पंजीयन, 4 दिन तक चलेगा यह सिलसिला
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Updated: 26 Aug 2018, 10:30 PM IST
Rakshabandhan in Jail
Rakshabandhan in Jail

अंबिकेापुर. भाई-बहन के अटूट पे्रम का पर्व रक्षाबंधन सरगुजा संभाग में धूमधाम से मनाया गया। बहन व भाइयों को इस दिन का इंतजार बड़ी ही बेसब्री से रहता है। शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों की कलाइयों पर रेशम की डोर बांधी। बहनों ने तिलक लगाकर भाइयों की आरती उतारी तथा राखी बांधकर सुरक्षा का वचन लिया।

वहीं सेंट्रल जेल अंबिकापुर में अपने कैदी भाइयों व बहनों को राखी बांधने काफी दूर-दराज से बहनें पहुंची थीं। राखी बांधने के दौरान माहौल काफी भावुक हो गया। इधर कई बहनों के राखी बांधने में आधार कार्ड का अड़ंगा लग गया।

जिन बहनों के पास आधार कार्ड नहीं था उन्हें बंदी भाइयों से नहीं मिलने दिया गया। ऐसे में बहनों के चेहरे पर मायूसी दिखी और उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।

केंद्रीय जेल में लगी बहनों की भीड़
कई बहनों के लिए राखी का यह त्योहार भावुक करने वाला भी था। ऐसी कई बहनें हैं जिनके भाई व बहन किसी अपराध में जेल में निरुद्ध हैं। ऐसी बहनें राखी बांधने दूर-दराज से केंद्रीय जेल पहुंची थीं। उन्हें जेल के नियम-कानून के हिसाब से चलना पड़ा। बहनें राखी का थाल सजाकर व मिठाई लेकर आई थीं।

सुबह 8 बजे से ही जेल में बहनों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। जब उनका नंबर आया तो उन्हें जेल के भीतर भाइयों को राखी बांधने भेजा गया। जेल के भीतर अपने भाई व बहन को देखकर कइयों की आंखें नम हो गईं। रेशम की डोर से कलाई सजाते समय दोनों एक-दूसरे को प्यार से निहारते रहे। इस दौरान माहौल काफी भावुक हो गया।

आधार कार्ड देखकर दिया गया प्रवेश
जेल के अंदर प्रवेश करने के पूर्व बहनों व परिजनों को आधार कार्ड दिखाना जरूरी था। घर के मुखिया के आधार कार्ड देखकर तो परिवार के सदस्यों को मिलने दिया गया लेकिन जिनके पास आधार कार्ड नहीं था उन बहनों को भी रोक दिया गया। जेल अधीक्षक ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर अगर किसी परिवार के ५ लोग आए थे तो उनमें से किसी एक का आधार कार्ड देखा जा रहा था। वहीं सुरक्षा के लिहाज से ही बिना आधार कार्ड के नहीं मिलने दिया गया।


जेल अधीक्षक ने माफ की सजा
केद्रीय जेल में निरूद्ध बंदियों की दस दिनों की सजा राखी के अवसर पर माफ की गई। जेल अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़ ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर भाई-बहन के लिए जेल प्रबंधन ने एक सकारात्मक निर्णय लिया है। अधीक्षक ने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए सभी सजा काट रहे बंदियों की निर्धारित सजा में से 10 दिनों की सजा माफ करने का आदेश जारी किया है।


1956 परिजन पहुंचे
रक्षाबंधन के अवसर पर केंद्रीय जेल में बंद 769 बंदियों के 1956 परिजन ने जेल में अपने भाइयों से मुलाकात की। इस दौरान महिला जेल प्रकोष्ठ में बंद 17 महिला बंदियों द्वारा 28 भाइयों को राखी बांधी गई। अधीक्षक द्वारा जेल में विशेष व्यवस्था की गई थी। जेल के अंदर ही परिजन द्वारा लाए गए सामान की जांच की जा रही थी।

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