ब्रेन हेमरेज के बाद सीतापुर विधायक के कहने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 6 दिन पहले कराया गया था भर्ती, डीन से कहकर कराया था रेफर
अंबिकापुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल की व्यवस्था इस कदर चरमराई हुई है कि रेफर मरीज को रायपुर जाने के लिए समय पर एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं हो पाती। चाहे मरीज की अस्पताल में ही तड़पकर मौत क्यों न हो जाए। ऐसा ही एक मामला रविवार की सुबह 11 बजे प्रकाश में आया। 6 दिन से भर्ती मैनपाट की 60 वर्षीय महिला का ब्रेन हेमरेज का इलाज के बाद भी स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर शनिवार की सुबह रायपुर के लिए रेफर कर दिया गया था।
लेकिन 24 घंटे गुजर जाने के बाद भी उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा पाया। ऐसे में महिला की तड़पकर अस्पताल में ही मौत हो गई। बाद में उसे मुक्तांजलि वाहन से घर भेजा गया। चूंकि महिला को सीतापुर विधायक के कहने पर भर्ती कराया गया था।
विधायक ने रविवार की सुबह 8 बजे स्वयं संजीवनी को फोन किया था इसके बावजूद 4 घंटे बाद वाहन पहुंचा। इस दौरान विधायक अस्पताल में ही बैठे रहे। वे अस्पताल की व्यवस्था को लेकर काफी नाराज थे। उन्होंने कलक्टर को भी इस बात से अवगत कराया।
मैनपाट के सवनिया पंचायत के ग्राम नागाडांड़ निवासी गिरजावती यादव 60 वर्ष 6 दिन पूर्व घर में बेहोश हो गई थी। उसे ब्रेन हेमरेज हुआ था। सीतापुर विधायक अमरजीत भगत को जब यह बात पता चली तो उन्होंने महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया।
यहां महिला का इलाज चलता रहा लेकिन तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। शनिवार की सुबह परिजनों के माध्यम से जब विधायक को यह जानकारी हुई तो उन्होंने डीन से महिला को रायपुर के लिए रेफर करने कहा। उन्होंने डीन से एंबुलेंस की व्यवस्था करने भी कहा था।
महिला को शनिवार की सुबह 10 बजे रेफर कर दिया गया। इधर परिजन एंबुलेंस आने का इंतजार करते रहे। जब वे अस्पताल प्रबंधन से पूछते तो कहा जाता कि थोड़ी देर रुक जाइए, एंबुलेंस आ रही है। एंबुलेंस के इंतजार में शनिवार की सुबह से रविवार की सुबह हो गई। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी महिला अस्पताल में ही पड़ी रही और तड़पकर सुबह 11 बजे उसकी मौत हो गई। फिर उसे मुक्तांजलि वाहन से घर भिजवाया गया।
विधायक ने सुबह 8 बजे किया था फोन
रामानुजगंज विधायक की बेटी की कीटनाशक पीने से मौत के सिलसिले में सीतापुर विधायक भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल सुबह पहुंचे थे। ८ बजे जब उन्हें यह बात पता चली कि अभी तक एंबुलेंस नहीं पहुंची है तो उन्होंने स्वयं संजीवनी के लिए फोन लगाया। वहां से यह जवाब आया कि आ रहे हैं। इस दौरान विधायक अस्पताल में ही यह देखने के लिए बैठे रहे कि आखिर कब संजीवनी वहां पहुंचती है। विधायक के फोन करने के 4 घंटे बाद संजीवनी वहां पहुंची लेकिन बुजुर्ग महिला की मौत हो चुकी थी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इस लापरवाही पर विधायक भड़क गए।
कलक्टर को भी दी थी जानकारी
इससे पूर्व विधायक ने कलक्टर को भी फोन पर इस मामले की जानकारी दे दी थी। कलक्टर ने सीएमएचओ को तत्काल मामला देखने कहा था। मौके पर सीएमएचओ एनके पांडेय भी पहुंचकर सिर्फ तमाशा देखते रहे। अंतत: महिला को बचाया नहीं जा सका। इस दौरान विधायक यहां की व्यवस्था को लेकर काफी नाराज दिखे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई।
करना पड़ेगा बड़ा आंदोलन
विधायक अमरजीत भगत ने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल की व्यवस्था सुधारने बड़े आंदोलन की जरूरत है। जल्द ही हम आंदोलन करेंगे।