स्वास्थ्य आयुक्त की हिदायत के बाद भी मेडिकल कॉलेज के सहायक प्राध्यापकों ने उनकी एक न सुनी, जिसका खामियाजा मरीज को उठाना पड़ा।
अंबिकापुर. वीडियो कान्फ्रेसिंग के दौरान स्वास्थ्य आयुक्त आर प्रसन्ना ने मेडिकल कॉलेज में पदस्थ सभी सहायक प्राध्यापकों व संविदा प्राध्यापकों को स्पष्ट रूप से कहा था कि अगर नौकरी करनी है तो सिस्टम के अनुसार चलना होगा। एक दो लोगों की वजह से पूरे सिस्टम को नहीं बिगडऩे दिया जा सकता है।
इसके बाद उन्होंने डाक्टरों द्वारा आपत्ति किए जाने पर कहा था कि इंमरजेंसी ड्यूटी तो करनी होगी और जो नहीं कर सकते वे नौकरी छोड़कर जा सकते हैं। सख्ती के बावजूद रोस्टर के अनुसार शुक्रवार को भी इंमरजेंसी ड्यूटी पर मेडिकल कॉलेज में पदस्थ कोई भी डाक्टर नहीं पहुंचा, इनकी इस लापरवाही का खामियाजा अब मरीजों को जान देकर भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार की दोपहर २ बजे से ८ बजे तक दो डाक्टरों की इमरजेंसी ड्यूटी लगाई गई थी।
ड्यूटी पर एक चिकित्सक तो पहुंचे, लेकिन उनके साथ मेडिकल कॉलेज के जिस सहायक प्राध्यापक की ड्यूटी लगाई गई थी वे नहीं पहुंचे। इंमरजेंसी ड्यूटी के दौरान वार्ड में परेशानी होने पर ड्यूटी पर पहुंचे डाक्टर अंदर मरीजों को देखने गए हुए थे। इस दौरान उन्हें वार्ड से मरीजों को देखकर वापस लौटने में लगभग आधा घंटा से अधिक समय लग गया।
इस बीच हार्ट की मरीज मुन्नी बाई गम्भीर स्थिति में पहुंची थी और आपातकालीन कक्ष में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसकी वजह से उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसने दम तोड़ दिया। ऐसे में आपातकालीन ड्यूटी नहीं करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ क्या जवाबदारी तय की जाती है यह सबसे बड़ा प्रश्न है। डॉक्टर खुलेआम निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन मौन साधे हुए है।
कमिश्नर ने दिए वेतन रोकने के आदेश
सरगुजा कमिश्नर रीता शांडिल्य की अध्यक्षता में शुक्रवार को जीवन दीप समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें अनुपस्थित चिकित्सकों का वेतन रोकने का भी आदेश जारी किया गया। इसके साथ ही संयुक्त संचालक द्वारा भी सभी अनुपस्थित चिकित्सकों को नोटिस जारी करते हुए पूर्व में एफआईआर किए जाने का जो आदेश जारी किया गया था, उसपर एक्शन लेने की बात कही गई है।
निजी चिकित्सालय जा रहे हैं मरीज
जिला चिकित्सालय के जिम्मे सारी व्यवस्था ठीक चल रही थी। फिर शासन ने मेडिकल कॉलेज खोल यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया। लेकिन चंद डॉक्टरों के अडिय़ल रवैये की वजह से पूरी व्यवस्था ही चरमरा गई है और इस तरफ न तो जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन। जबकि इन दिनों अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि उन्हें जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
बिगड़ रही व्यवस्था
असिस्टेंट प्रोफेसरों द्वारा इमरजेंसी ड्यूटी से इनकार करने से मेडिकल कॉलेज अस्पताल की व्यवस्था बिगड़ती जा रही है और यहां पहुंचने वाले मरीज निजी चिकित्सालयों की तरफ रुख कर रहे हैं। अब प्रशासन को सख्त रुख अपनाने की जरूरत है, नहीं तो इनकी मनमानी पूरी सिस्टम पर प्रभाव डाल सकती है।